नूरपुर (कांगड़ा)। वर्कचार्ज सेवा अवधि को सेवानिवृत्ति लाभों में शामिल न करने के फैसले के विरोध में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत पेंशनर फोरम ने हाईकोर्ट जाने का ऐलान किया है। बुधवार को विद्युत विश्राम गृह बौढ़ में अध्यक्ष मान सिंह धीमान की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया है।
पदाधिकारियों ने कहा कि इस निर्णय से पेंशनरों को प्रतिमाह 1,000 से 1,500 रुपये तक का आर्थिक नुकसान होगा, इसलिए इस आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। बैठक में फोरम के सचिव अरुण सहोत्रा, उपप्रधान सुभाष चौधरी, मुख्य सलाहकार जाटू राम और जवाली इकाई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चैन सिंह पठानिया ने कहा कि बोर्ड प्रबंधन का 4 अप्रैल का आदेश पेंशनरों के हितों पर कुठाराघात है।
इसके साथ ही 2016 से 2022 के बीच और सितंबर 2025 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी व लीव इनकैशमेंट का भुगतान भी अब तक अटका हुआ है। फोरम ने 65 से 70 वर्ष की आयु वाले पेंशनरों के सभी बकाये तुरंत जारी करने और बोर्ड में रिक्त 13 हजार पदों पर आउटसोर्स के बजाय स्थायी भर्तियां शुरू करने की मांग की।
फतेहपुर में भी उठी आवाज... सीएम को भेजा ज्ञापन
फतेहपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत कर्मचारी यूनियन और विद्युत पेंशनर फोरम ने बिजली बोर्ड कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग तेज कर दी है। यूनियन के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी अश्विनी ठाकुर और पेंशनर फोरम के राज्य उपाध्यक्ष पवन मोहल की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने विधायक भवानी सिंह पठानिया के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रदेश के 1.36 लाख कर्मचारियों की तर्ज पर कठिन परिस्थितियों में सेवाएं देने वाले बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को भी जल्द ओपीएस का लाभ दिया जाए।