टांडा (कांगड़ा)। प्रदेश के दूसरे बड़े मेडिकल कॉलेज टांडा के ट्राॅमा सेंटर और आपातकालीन वार्ड में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञ कम होने के कारण गंभीर मरीजों को ज्यादातर पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
टांडा के ट्राॅमा और आपातकालीन वार्ड में हर दिन औसत 285 रोगी भर्ती होते हैं। दोनों वार्डों में डॉक्टर के 14 पद स्वीकृत हैं लेकिन संस्थान में मौजूदा समय में केवल छह ही विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। टांडा में आठ विशेषज्ञों के पद खाली चल रहे हैं। इस वजह से मरीजों को काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं। दोनों वार्डों में रेडियोथेरपी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और हिस्टोलॉजी के विशेषज्ञ नहीं हैं। विशेषज्ञों की कमी के चलते सारा बोझ अन्य विशेषज्ञों पर पड़ रहा है।
टांडा मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर और आपातकालीन वार्ड में आठ विशेषज्ञों की कमी है। विशेषज्ञों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवाया गया है। जब विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी तो यह समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।
-डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, टांडा मेडिकल कॉलेज