नूरपुर (कांगड़ा)। पड़ोसी राज्य पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे नूरपुर समेत इंदौरा, जवाली और फतेहपुर उपमंडलों की सीमांत खड्डों में अवैध खनन माफिया खनिज संपदा को लूटने में लगा है। जवाली विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर अन्य तीनों हलकों की सीमाएं पंजाब से सटी होने के कारण इनकी हदबंदी न होने की वजह से खनन माफिया पर नकेल कसना मुश्किल हो रहा है।
दरअसल, नूरपुर स्थित खनन विभाग के कार्यालय के तहत नूरपुर उपमंडल में चक्की बेल्ट, इंदौरा में डमटाल से सटा चक्की और ब्यास नदी से सटी पंजाब की सीमा पर इंटर स्टेट डिमार्केशन (हदबंदी) का मसला कई सालों से दोनों राज्यों के बीच लटका होने के कारण इन सीमांत खड्डों में सक्रिय अवैध खनन माफिया बेखौफ खनिज संपदा लूटने में जुटा है।
यही नहीं, जब कभी पुलिस-प्रशासन या खनन विभाग छापे मारता है तो ये लोग अक्सर इसकी भनक लगते ही जेसीबी मशीनों और टिपरों को पंजाब की सीमा में भगाकर पुलिस को गच्चा दे जाते हैं। हालांकि, अवैध खनन की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन चक्की एरिया की राजस्व विभाग से पैमाइश करवाकर इसकी हदबंदी करवाना चाहता है और इसके लिए नूरपुर प्रशासन ने पठानकोट के प्रशासन से कई बार पत्राचार कर चक्की की हदबंदी के बारे में लिखा है। नूरपुर प्रशासन को अभी तक इसके बारे में पंजाब के संबंधित प्रशासन से सहयोग नहीं मिल पाया है। बहरहाल, अवैध खनन रोकने के लिए खनन अधिकारी ने विभागीय कर्मचारियों से बैठक कर अवैध खनन माफिया पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विभागीय जानकारी के मुताबिक खनन कार्यालय नूरपुर के तहत इन क्षेत्रों में विभाग ने अगस्त 2024 से लेकर जनवरी 2026 तक अवैध खनन के लगभग 850 मामले पकड़े हैं। इनमें करीब 66 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। इन मामलों में लगभग 40 जेसीबी, 155 टिपर, 635 ट्रैक्टर पकड़े हैं। खनन अधिकारी नूरपुर सुरेश कुमार ने बताया कि चार उपमंडलों में से जवाली को छोड़कर नूरपुर, इंदौरा और फतेहपुर में पंजाब के साथ लगती कई जगहों पर हदबंदी न होने के कारण अवैध खनन की संभावना ज्यादा रहती है। पंजाब से सटे सीमांत क्षेत्रों में राजस्व हदबंदी काे लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों सहित स्थानीय पुलिस प्रशासन को अवगत करवाया गया है।