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Kangra News: बढ़ती गर्मी, चारे की कमी से पहाड़ों की ओर निकलने लगे भेड़पालक

Fri, 04 Apr 2025 01:05 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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शाहपुर (कांगड़ा)। मौसम में हो रहे बदलाव और बढ़ती गर्मी के कारण कांगड़ा और चंबा के भेड़पालक अब धीरे-धीरे पहाड़ों की ओर रुख करने लगे हैं। जहां वे अगले छह महीनों तक अपनी भेड़-बकरियों को चराएंगे। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें भेड़पालक अपने घरों से बाहर रहकर जीवनयापन करते हैं। भेड़पालक बताते हैं कि गर्मी बढ़ने के कारण मैदानी इलाकों में घास की कमी हो जाती है, जिससे उन्हें पहाड़ों की ओर पलायन करना पड़ता है।
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चंबा और कांगड़ा के भेड़पालक अब एक महीने के पैदल सफर के बाद पहाड़ों तक पहुंचते हैं। भेड़पालकों के लिए पशुपालन विभाग की ओर से दरिणी, बीड़ और सकरी में भेड़ बकरियों को बीमारी से बचाने के लिए वैक्सीनेशन और नहलाने के लिए डिप टैंक बनाए गए हैं। भेड़-पालकों को पहाड़ों पर लौटने से पहले जिन्होंने अपनी भेड़ बकरियों की वैक्सीनेशन नहीं करवाई है, उन्हें वैक्सीनेशन करवानी होगी। वीरवार को विधानसभा क्षेत्र शाहपुर पहुंचे बोह घाटी के भेड़पालक राज कुमार, विधि चंद और चानू राम ने बताया कि वे हर साल अक्तूबर में मैदानी इलाकों में पहुंचते थे लेकिन अब गर्मी और घास की कमी के कारण पहाड़ों की ओर वापस लौटना पड़ता है। वे इस पारंपरिक व्यवसाय को बचाए रखने के लिए सालभर बाहर रहते हैं, हालांकि अब यह व्यवसाय बहुत कम हो चुका है।
सरकार से मदद की कमी और सुरक्षा की चिंता
भेड़पालकों ने बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे कि रात के समय यात्रा करते हुए लूटपाट का डर। उन्होंने बताया कि चोर और लुटेरे रात के समय उनकी भेड़-बकरियों को हथियारों के बल पर लूट लेते हैं। भेड़पालकों का कहना है कि इस व्यवसाय को जीवित रखने के लिए सरकार से कोई ठोस मदद नहीं मिल रही है और सुरक्षा के इंतजाम भी न के बराबर हैं। भेड़पालकों ने सरकार से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है ताकि उनकी यात्रा सुरक्षित हो और इस परंपरा को बचाया जा सके।
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