तालाब में ड्रोन से स्प्रे को छिड़काव करते हुए।
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राजा का तालाब(कांगड़ा)। लगभग दो हेक्टेयर क्षेत्र में फैली ऐतिहासिक धरोहर राजा का तालाब के अस्तित्व को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। संयुक्त विभागों की टीम ने शुक्रवार को ड्रोन के माध्यम से गलाईफोसेट प्लस यूरिया के मिश्रण के घोल का छिड़काव किया। हिमाचल में ड्रोन के माध्यम से स्प्रे किए जाने का यह पहला मामला है।
यह छिड़काव पूरे तालाब में फैल चुकी एलिगेटर बीड्स और जलकुंभी को जड़ से खत्म करने के लिए किया गया। इस अवसर पर जिलाधीश डॉ. निपुण जिंदल विशेष रूप से उपस्थित रहे। दरअसल क्षेत्र के प्रबुद्ध लोगों ने तालाब की दयनीय दशा पर जिलाधीश को अवगत करवाया था। इस बीच डीसी ने विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद एक संयुक्त विभागीय टीम को इसके जीर्णोद्धार का जिम्मा सौंपा। ऐसे में संयुक्त टीम द्वारा 18 अप्रैल, 22 को पांच ऑनफॉर्म ट्रायल लगाए गए। गलाईफोसेट प्लस यूरिया का परिणाम सबसे बेहतर पाए जाने पर विभागीय टीम ने सावधानी बरतते हुए शुक्रवार सुबह लगभग साढ़े दस बजे जिलाधीश के आने पर ड्रोन के माध्यम से इसका छिड़काव करना शुरू किया।
इस दौरान तालाब के आसपास स्थित शिक्षण संस्थान और दुकानें बंद रखीं गईं। जिलाधीश ने कहा कि यह कार्य काफी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में बड़ा क्षेत्र होने के कारण इसके बीच उतरना बड़ा मुश्किल था। इसलिए ड्रोन के माध्यम से स्प्रे करने का फैसला लिया गया। वहीं उपनिदेशक कृषि डॉ. राहुल कटोच का कहना है कि यह ऐतिहासिक तालाब है और जिलाधीश के निर्देशानुसार इसमें फील्ड ट्रायल लगाए गए थे, जिस फार्मूलेशन के परिणाम बहुत बेहतर पाए गए, तालाब में उसका छिड़काव किया गया है।