बिना बारिश और बिना सिंचाई मुरझाई सरसों की फसल। -स्रोत : जागरूक किसान
नूरपुर (कांगड़ा)। जिले के निचले मैदानी इलाकों में किसानों को इस बार मौसम और व्यवस्था के दोहरे वार का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक ओर बारिश न होने के कारण गेहूं की बिजाई प्रभावित हो रही है, वहीं सरकार द्वारा उपलब्ध कराए नलकूपों से वितरण प्रणाली ठप है। यह डबल अटैक कांगड़ा के 2.35 लाख कृषक परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट पैदा कर रहा है।
अमूमन नवंबर के दूसरे पखवाड़े में शुरू होने वाली गेहूं की बिजाई रुक गई है, जबकि लंबे ड्राई स्पेल के चलते अगेती सरसों की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। यह स्थिति रबी सीजन के उत्पादन पर प्रतिकूल असर डालेगी, जिससे अन्नदाता हताश हैं। लंबे समय से बारिश न होने के कारण सरसों, चना, मसूर और हरे चारे की बरसीम जैसी रबी सीजन की फसलें सूखे की भेंट चढ़ सकती हैं।
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो मौसम की यह बेरुखी यूं ही चलती रही तो रबी सीजन के फसल उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा। नूरपुर, जवाली, फतेहपुर जैसे गेहूं और मक्की की पैदावार के लिए अग्रणी माने जाने वाले क्षेत्रों के किसान, बारिश के लिए आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं।
सरकारी प्रयास विफल, किसान वंचित
बारिश पर निर्भर किसानों के लिए यह दोहरी त्रासदी है। राज्य और केंद्र की योजनाओं के तहत नलकूप लगाकर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध तो करवाई गईं, लेकिन कई जगहों पर उनकी वितरण प्रणाली खराब अथवा ठप होने से ये प्रयास विफल हो रहे हैं। किसानों कुलजीत राणा, हरदीप सिंह, पवन शर्मा आदि का कहना है कि वे हर साल मौसम की मार झेलते हैं। अब सिंचाई सुविधा न मिलने से उनकी मजबूरी और बढ़ गई है। वे एक बार फिर पूरी तरह से प्राकृतिक बारिश पर निर्भर हैं।