सीनेट ने दोहराया कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनना तिब्बती समुदाय का आंतरिक और धार्मिक विषय है, जिसमें किसी भी बाहरी हस्तक्षेप विशेषकर चीन की भूमिका को पूरी तरह अस्वीकार्य माना गया है। प्रस्ताव में 12 मार्च 2026 को चीन द्वारा पारित जातीय एकता कानून की कड़ी आलोचना की गई। सीनेट के अनुसार, यह कानून तिब्बती संस्कृति, भाषा और धार्मिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास है। साथ ही यह भी कहा गया कि सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता की रक्षा करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आवश्यक है और सभी देशों को इसका सम्मान करना चाहिए।
यह प्रस्ताव सीनेट की उपाध्यक्ष जित्का साइटलोवा द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसे प्रेमिस्ल राबास, ब्रेतिस्लाव रिखलिक और जिरी रूजिच्का सहित कई सदस्यों का समर्थन प्राप्त हुआ। बैठक की अध्यक्षता सीनेट के उपाध्यक्ष जिरी ओबरफाल्जर ने की। बैठक के दौरान चेक गणराज्य के राष्ट्रपति पेत्र पावेल और दलाई लामा के बीच जुलाई 2025 में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया गया। दलाई लामा की प्रतिनिधि थिनले चुक्की ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय विश्व को स्पष्ट संदेश देता है कि किसी भी सरकार को आध्यात्मिक परंपराओं पर नियंत्रण का अधिकार नहीं है। उन्होंने इसे तिब्बती लोगों के लिए आशा की किरण बताया।