नूरपुर (कांगड़ा)। प्रदेश में आम उत्पादन में अग्रणी कांगड़ा जिले का दशहरी आम घरेलू मंडियों में पहुंच गया है। इस बार ऑफ ईयर और कम पैदावार के कारण शुरुआती थोक भाव 20 से 35 रुपये प्रतिकिलो हैं। आने वाले दिनों में कुछ किस्मों के दाम 40 से 45 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
अन्य राज्यों के व्यापारियों ने भी जसूर मंडी में डेरा जमा लिया है। फिलहाल रोजाना 10 से 15 ट्रक विभिन्न मंडियों के लिए भेजे जा रहे हैं। शुरुआती दौर में 30 से 40 छोटे वाहन, जिनमें टैंपो, ट्रैक्टर और जीप शामिल हैं, बागवानों से आम लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। समय पर बारिश नहीं होने और उत्पादन कम रहने के कारण अच्छे आकार के आम को बेहतर दाम मिल रहे हैं। सामान्य आकार का आम 15 से 25 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है।
जसूर मंडी से पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र की मंडियों में दशहरी आम की खेप भेजी जा रही है। स्थानीय व्यापारियों रविंद्र कुमार, आशीष जसरोटिया, बलदेव पठानिया और उमेश चिब ने बताया कि मंडी में आम की आमद शुरू हो चुकी है। इस बार फसल कम होने के कारण अगले कुछ दिनों में बाजार में मांग बढ़ने पर दाम और बढ़ सकते हैं।
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फ्लावरिंग के समय ही बिक जाते हैं बगीचे
कांगड़ा के आम की बड़ी मात्रा अन्य राज्यों की मंडियों में भेजी जाती है। व्यापारी फ्लावरिंग के समय ही आम के बगीचे खरीद लेते हैं और फसल तैयार होने पर उसे स्वयं मंडियों में बेचते हैं या अन्य राज्यों में भेजते हैं। सरकार की ओर से हिमफेड और एचपीएमसी भी आम की खरीद करती हैं।
21 हजार हेक्टेयर में होती है आम की खेती
जिले में करीब 41 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फलों की खेती होती है जिससे लगभग 48 हजार मीट्रिक टन फल उत्पादन होता है। जिले में आम, नींबू वर्गीय फलों और लीची की प्रमुख पैदावार होती है। कुल बागवानी क्षेत्र के लगभग 21 हजार हेक्टेयर (52 प्रतिशत) हिस्से में आम की खेती होती है जिससे हर वर्ष करीब 20 हजार मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है।
देसी और अचारी आम बाजार से हो रहे गायब
इस बार बाजार में देसी और अचारी आम लगभग नदारद हैं। कलमी आमों की खेती को बढ़ावा मिलने से देसी आम के पेड़ तेजी से कम होते गए। बागवानों का रुझान भी दशहरी और अन्य उन्नत किस्मों की ओर बढ़ने से देसी आम अब लुप्त होने की कगार पर पहुंच गया है।