अमर उजाला ब्यूरो
कांगड़ा। अदालत ने एक नवजात बच्ची को झाड़ियों में जिंदा फेंकने के आरोप में एक व्यक्ति और महिला को सजा सुनाई है। उस दौरान दोनों युवक-युवती का प्रेम प्रसंग था और युवती गर्भवती हो गई। उसने पठानकोट के एक अस्पताल में लड़की को जन्म दिया और चक्की बैंक के किनारे बच्ची को फेंक दिया। बच्ची जिंदा हालात में पठानकोट निवासी देवीदास नाम के व्यक्ति को मिली। उसने पठानकोट पुलिस को सूचना दी और लड़की को अपनी बहन दर्शना देवी, जिसके यहां कोई बच्चा नहीं है उसके हवाले कर दिया। बाद में युवती ने कांगड़ा पुलिस थाना में युवक संतोष कुमार
निवासी लंज के खिलाफ उसके बच्चे का जबरन गर्भपात करवाने की शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इसी जांच के दौरान सारा वाक्या सामने आया। जांच के दौरान पाया गया कि बच्चे का गर्भपात नहीं, बल्कि लड़की जिंदा पैदा हुई और उसे दोनों ने मिलकर चक्की बैंक के नीचे फेंक दिया। इसके लिए पुलिस ने महिला को भी आरोपी मानकर उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 317 के तहत मुकदमा दर्ज कर कांगड़ा की अदालत में चालान पेश किया। न्यायाधीश प्रथम श्रेणी एसीजेएम धीरू ठाकुर ने गवाहों के बयानों और पुलिस की जांच के आधार पर संतोष कुमार और महिला को दोषी करार देते हुए संतोष कुमार को दो साल की कैद, जिसमें एक महीने का कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना और महिला को एक साल की कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मामले की पैरवी जिला सहायक उपन्यायवादी श्वेता ने की। उन्होंने बताया कि बताया कि जुमार्ने की राशि लड़की के खाते में जमा करवानी होगी।