धर्मशाला। शिला में दूसरे की जमीन पर गोशाला बनाकर कब्जा करने के आठ साल पुराने मामले में अदालत ने जमीन मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत ने प्रतिवादियों को विवादित भूमि से कब्जा हटाकर तत्काल खाली भौतिक कब्जा असली मालिक को सौंपने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने जमीन के सीमांकन की रिपोर्ट को भी फैसले का अहम हिस्सा बनाया है। विनय बनाम रमेश व अन्य के इस दीवानी मामले में वादी ने दो अगस्त 2018 को मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि प्रतिवादियों ने शिला स्थित उनकी जमीन पर अवैध रूप से गोशाला का निर्माण कर लिया है।
आठ जून 2018 को राजस्व विभाग के सीमांकन में भी इस कब्जे की पुष्टि हुई थी, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद प्रतिवादियों ने जमीन खाली नहीं की। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने दलील दी कि उनकी गोशाला शामलात भूमि पर बनी है और सीमांकन उनकी गैरमौजूदगी में किया गया था।
हालांकि अदालत ने पाया कि सीमांकन के दौरान एक प्रतिवादी मौके पर मौजूद था। उसने निर्धारित तीन स्थायी बिंदुओं पर सहमति जताते हुए अपने अंगूठे का निशान भी लगाया था।प्रतिवादी गोशाला के शामलात भूमि पर बने होने का कोई भी ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सके।
अदालत ने राजस्व अधिकारी की सीमांकन रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए कब्जे को अवैध ठहराया। इसके बाद अदालत ने वादी का दावा स्वीकार करते हुए दोनों प्रतिवादियों को विवादित जमीन का कब्जा तत्काल सौंपने के आदेश जारी किए हैं।