धर्मशाला। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को एक सरकारी ठेकेदार का बकाया भुगतान करने के आदेश दिए हैं। विभाग को अब 1,05,200 रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ चुकानी होगी। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि विभाग ने ठेकेदार से काम तो करवाया, लेकिन उसका पूरा भुगतान नहीं किया, जो कि अनुचित है।
शाहपुर तहसील निवासी एक सरकारी ठेकेदार को वर्ष 2012 में करीब 44 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण का कार्य आवंटित हुआ था। निर्माण के दौरान वन विभाग और स्थानीय भूमि मालिकों की आपत्तियों के कारण सड़क का कुछ हिस्सा मूल नक्शे पर नहीं बन सका। इसके समाधान के लिए विभाग ने वैकल्पिक स्थान पर काम करने के लिए चार अलग-अलग ‘वर्क ऑर्डर’ जारी किए।
ठेकेदार (वादी) का आरोप था कि उसने विभाग के निर्देशानुसार वैकल्पिक स्थानों पर अतिरिक्त कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था, लेकिन विभाग ने उसका करीब 2 लाख रुपये का भुगतान रोक दिया। लंबे समय तक विभाग के चक्कर काटने के बाद ठेकेदार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विभाग को ठेकेदार द्वारा किए गए अतिरिक्त कार्यों का लाभ प्राप्त हुआ है।
वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश डॉ. हकीकत ढांडा ने अपने फैसले में कहा कि परिस्थितियों के अनुसार विभाग का यह दायित्व बनता है कि वह किए गए कार्य का भुगतान करे। विभाग काम का लाभ लेने के बाद भुगतान से इनकार नहीं कर सकता। इसी आधार पर अदालत ने वादी के पक्ष में आंशिक डिक्री पारित करते हुए बकाया राशि ब्याज सहित देने का फैसला सुनाया।