धर्मशाला। टांडा अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव पाए गए अमेरिका से लौटे 69 साल के बुजुर्ग तिब्बतियन तेंजिन छोपेल की मौत के बाद पूरे जिले में सनसनी मच गई। सोशल मीडिया में लोग इस जानकारी को देर रात तक शेयर करते हुए अपने सगे संबंधियों को सतर्क रहने की हिदायत देते रहे। तिब्बती समुदाय में भी बेहद डर पैदा हो गया है। कई तिब्बती शहर छोड़ने का प्लान बना रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि बाहर से आ रहे तिब्बती प्रशासन को जानकारी क्यों नहीं दे रहे? निर्वासित तिब्बत सरकार आखिर सोई क्यों है?
छोपेल 21 मार्च को मैकलोडगंज अपने परिवार के पास दिल्ली से टैक्सी से पहुंचा था। इसलिए देर रात प्रशासन ने मैकलोडगंज में कर्फ्यू लगा दिया। यानी, मैकलोडगंज में अब कोई भी व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकल सकेगा। प्रशासन ने मैकलोडगंज में कर्फ्यू इसलिए लगाया, जिससे शहर में कोई और व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित न हो। बुजुर्ग तिब्बतयन 15 से 21 मार्च तक दिल्ली में कहां रहा, प्रशासन देर रात तक इसकी जानकारी जुटाने में रहा, जिससे उस दौरान उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उन्हें आईसोलेशन में भेजा जाए। बालाजी अस्पताल के सौ ज्यादा स्टाफ को आईसोलेशन में भेज दिया गया है। 21 मार्च को बुजुर्ग तिब्बतियन जिस टैक्सी को किराये पर लेकर मैकलोडगंज आया था, उसके चालक की पहचान देर शाम प्रशासन ने कर ली है। चालक और उसके परिवार के सदस्यों को गृह निगरानी में रखा जा रहा है।
कोरोना पॉजिटिव महिला का हंगामा, बुलानी पड़ी पुलिस
टांडा में पहले से दाखिल कोरोना पॉजिटिव महिला इलाज के दौरान काफी हंगामा कर रही है। इलाज में वह टांडा अस्पताल के स्टाफ को सहयोग नहीं कर रही है। टांडा अस्पताल प्रबंधन ने इसकी शिकायत डीसी कांगड़ा से की। इसके बाद टांडा में महिला को संभालने के लिए पुलिस भेजनी पड़ी। अब जाकर महिला का इलाज डॉक्टर कर पा रहे हैं। डीसी कांगड़ा राकेश प्रजापति ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने शिकायत की थी। इसके बाद टांडा में महिला को संभालने के लिए पुलिस भेजनी पड़ी थी। महिला शुरू से ही सहयोग नहीं कर रही है।