जवाली (कांगड़ा)। उपमंडल जवाली के एक सरकारी स्कूल में स्टाफ की लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण एक छात्रा का भविष्य अधर में लटक गया है। छात्रा ने सीबीएसई बोर्ड की दसवीं की परीक्षा दी, लेकिन उसे कंपार्टमेंट आ गई। इसके बाद अभिभावकों ने सरकारी स्कूल में 11वीं कक्षा में दाखिला करवा दिया। कंपार्टमेंट के चलते स्कूल में छात्रा की प्रोविजनल एडमिशन हुई।
जब छात्रा ने कंपार्टमेंट की परीक्षा दी तो वह उसमें पास नहीं हो सकी। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने 11वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम रोकने की बजाय उसे पास करके 12वीं कक्षा में फिर से दाखिला दे दिया। अब जब छात्रा 12वीं कक्षा का परीक्षा फार्म भरने गई तो स्टाफ ने उसे दसवीं की मार्कशीट में पास न होने के कारण 10वीं कक्षा में वापस भेज दिया है। इससे छात्रा मानसिक तनाव में आ गई है।
नियमानुसार 11वीं कक्षा का परिणाम घोषित करने से पहले छात्रा की 10वीं कक्षा की मार्कशीट की जांच करनी चाहिए थी। मगर स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण छात्रा के तीन साल बर्बाद हो गए हैं। अभिभावक अब मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा निदेशक से इस लापरवाही के लिए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
उधर, स्कूल प्रिंसिपल ने बताया कि छात्रा का प्रवेश अस्थायी था और अभिभावकों से मूल दस्तावेज की मांग की गई थी। अभिभावकों ने जो दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, उनमें टेंपरिंग पाई गई है। इस आधार पर स्कूल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है और छात्रा को 10वीं के लिए रिवर्स कर दिया है।