धर्मशाला। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में गर्भवती महिलाओं के निशुल्क प्रसव कराने के सरकारी दावे धरातल पर दम तोड़ रहे हैं। अस्पताल में सामान्य प्रसव के लिए तीमारदारों को निजी मेडिकल स्टोरों से लगभग 1,000 से 1,100 रुपये और सिजेरियन के लिए करीब 5,000 रुपये का सामान जेब से खरीदना पड़ रहा है।
प्रतिदिन 20 से अधिक प्रसव करवाने वाले इस अस्पताल में सिरिंज, ग्लव्स और टांके लगाने वाले धागे तक बाहर से मंगाए जा रहे हैं। इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। सरकार का दावा है कि किसी भी सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिला का प्रसव निशुल्क होता है लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है।
इस बारे में जब गायनी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक वर्मा से पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री से पूछें या किसी अन्य अस्पताल में प्रसव करवाएं जहां निशुल्क सुविधा मिल रही हो।
केस स्टडी
एक पीड़ित तीमारदार साइलेश ने बताया कि 11 अगस्त को उनकी पत्नी को भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने पहले 1,100 रुपये का सामान्य प्रसव का सामान और फिर 5,000 रुपये का सिजेरियन का सामान मंगवा लिया। प्रसव सामान्य हुआ लेकिन जब वह अतिरिक्त सामान मेडिकल स्टोर पर वापस करने पहुंचे तो उसमें से करीब 800 रुपये की कीमत के टांके लगाने वाले धागे गायब मिले।
तीमारदार की शिकायत मिलने के बाद विभागाध्यक्ष से बात की गई है जिन्होंने सरकार की ओर से सामान की आपूर्ति नहीं होने की बात कही है। इस पूरे प्रकरण की जांच कर मरीजों व तीमारदारों को राहत पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। -डॉ. विवेक बन्याल, एमएस, टांडा अस्पताल