धर्मशाला। शहर से लेकर कस्बों तक लावारिस कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। जिम्मेदार विभागों के नियंत्रण के दावे कागजों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। पार्कों से लेकर बाजार, स्कूल, अस्पताल और कॉलोनियों समेत कोई भी सार्वजनिक स्थल ऐसा नहीं बचा है, जहां लावारिस कुत्तों का आतंक न हो। आए दिन काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। बावजूद इसके न तो ठोस कार्रवाई हो रही है और न ही कोई प्रभावी नीति लागू की जा रही है।
किसी भी सार्वजनिक स्थल पर कुत्तों की रोकथाम के लिए न तो चहारदीवारी नजर आ रही है और न कोई पहरेदार है। बस अड्डे से लेकर अस्पतालों तक स्थिति ऐसी ही बनी हुई है। हैरत की बात तो यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर कोई कुत्तों को खाना खिलाता है तो वह भी जवाबदेही होगा लेकिन धर्मशाला में कई मीट शॉप वाले कुत्तों को कच्चा मांस खिला रहे हैं, जिससे कुत्ते और अधिक आक्रामक हो रहे हैं और लोगों पर हमला कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुत्ते वाहनों के पीछे भागकर हादसों का कारण बन रहे हैं। संवाददाता ने बुधवार को पड़ताल के दौरान पाया कि धर्मशाला में किसी भी सार्वजनिक स्थल पर कुत्तों को रोकने या उनकी नो एंट्री के लिए कोई प्रबंध नहीं हैं। बस अड्डे से लेकर अस्पताल में भी कुत्ते सरेआम घूमते नजर आए। धर्मशाला-पालमपुर मार्ग पर बिजली बोर्ड कार्यालय के सामने मीट की दुकानों के बाहर दिनभर कुत्तों का डेरा लगा हुआ था और सड़कों के बीच में भी कुत्ते बैठे हुए थे। कुछ दुकानदार मुर्गों के अवशेषों को कुत्तों को खाने के लिए परोस रहे थे। वहीं, शाम के समय आहातों और चिकन फ्राई वाली दुकानों के बाहर कुत्तों को जूठन और हड्डियां डाली जा रही हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं आ रहा नजर
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्थानीय निकाय और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। कोर्ट ने जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संतुलित समाधान अपनाने को कहा था, लेकिन जमीनी स्तर पर न नसबंदी कार्यक्रम तेज हुए और न ही संवेदनशील इलाकों में कुत्तों की आवाजाही रोकने के उपाय किए गए। हालात ये हैं कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है। अस्पतालों में डॉग बाइट के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग सिर्फ बैठकों और रिपोर्टों तक सीमित हैं।
बात करें धर्मशाला अस्पताल की तो वहां हर माह डॉग बाइट के 150 से 200 मामले सामने आ रहे हैं, जो एक चिंता का विषय है। इसके अलावा जिले के अन्य अस्पतालों में भी स्थिति ऐसी ही है। नगर निगम का कहना है कि समय-समय पर लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जा रहा है। लेकिन धरातल पर सारे दावे हवा नजर आ रहे हैं।
नगर निगम की ओर से लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए दो संस्थाओं को हायर किया गया है, जो कार्य कर रही हैं। रही बात अन्य मुद्दों की तो अगले हफ्ते तक एक एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा, जिसमें संबंधित विभागों के विशेषज्ञ संस्थानों के साथ बैठक करेंगे। इससे हमें पता चल सकेगा कि कैसे कार्य किया जा सकता है, जिससे शहर से कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण पाया जा सके।
- जफर इकबाल, आयुक्त, नगर निगम धर्मशाला