धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुक्रवार को शाहपुर परिसर में समापन हो गया। विश्व पर्यावरण दिवस-2026 और अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित इस सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता से जुड़े विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में परमाणु सुरक्षा, संसाधनों के सतत उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकॉनमी) जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए 130 से अधिक वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
समापन सत्र में सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने जैव विविधता, पारिस्थितिकी, जलवायु अनुकूलन और आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में किए जा रहे शोध कार्यों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों और शोधार्थियों से वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
प्रथम तकनीकी सत्र में डीआरडीओ के डॉ. अमित आलोक ने वैश्विक परमाणु सुरक्षा पर व्याख्यान दिया, जबकि डॉ. पमिता भंडारी ने फूलों के कचरे के नवाचारपूर्ण उपयोग पर जानकारी साझा की। सम्मेलन में हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर विशेष गोलमेज चर्चा भी आयोजित की गई।
अंत में उत्कृष्ट मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियां देने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। सम्मेलन का समापन सह-संयोजक डॉ. नेहा चौधरी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।