एएसआई सरबजीत को सलामी देकर श्रद्धांजलि देती बीएसएफ की टुकड़ी।
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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) सरबजीत सिंह का शनिवार को उनके पैतृक गांव जरपाल में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे शुभम ने चिता को मुखाग्नि दी। असम में बीएसएफ की बटालियन में तैनात 59 वर्षीय सरबजीत सिंह का तीन सितंबर को तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल ले जाते समय निधन हो गया था।
शनिवार सुबह तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। बेटे का शव देखकर 87 वर्षीय पिता प्यारेलाल सन्याल बेसुध होकर गिर पड़े। वर्ष 1986 में बीएसएफ में भर्ती हुए सरबजीत सिंह अगले वर्ष अप्रैल में सेवानिवृत्त होने वाले थे। वे अपने पीछे वृद्ध पिता, पत्नी वीना देवी और तीन बेटे छोड़ गए हैं। पंचायत उपप्रधान प्रमोद पठानिया ने शोक जताते हुए कहा कि सरबजीत सिंह सदैव समाजसेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे और ग्रामीणों को भी इसके लिए प्रेरित करते थे। उनके आकस्मिक निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
श्मशान घाट पर बीएसएफ की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर सरबजीत सिंह को अंतिम विदाई दी। इस दौरान बीएसएफ कमांडेंट राजेश यादव, डिप्टी कमांडेंट लव कुमार, सब इंस्पेक्टर हरदीप कटोच, नगरोटा सूरियां चौकी प्रभारी योगेश प्रिंगल, एएसआई संजय और तहसीलदार ज्ञान चंद ने पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।