धर्मशाला। हाल ही में कांगड़ा पुलिस ने नशे के साथ पकड़े गए युवाओं से पूछताछ की, जिसमें यह बात सामने आई कि अकेलापन के कारण बोर होने और रोमांच की चाहत ने उन्हें नशे की ओर आकर्षित किया। पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कई युवा सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण नशे की आदत में फंसे हुए थे।
इसके अलावा कुछ मामलों में यह भी पाया गया कि माता-पिता के काम पर जाने के कारण बच्चे अकेलापन महसूस करते थे और इस अकेलेपन और बोरियत को दूर करने के लिए उन्होंने गलत संगत में पड़कर नशा करना शुरू किया। हालात अब ऐसे हैं कि नशे की आदत लगने के बाद इसे पूरा करने के लिए उनको नशे की तस्करी करने पर मजबूर होना पड़ा। युवाओं ने बोर होने, लक्ष्य निर्धारित न होने पर कुछ हटकर करने की चाह में नशे का सेवन करने की बात कबूली तो कांगड़ा पुलिस नशे में फंसे ऐसे युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग कर रही है।
दो माह में चिट्टा तस्करी के 30 मामले
जनवरी और फरवरी में करीब 30 मामले चिट्टा तस्करी के दर्ज किए जा चुके हैं। इसमें जिला कांगड़ा के अलावा पंजाब के भी करीब 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जिला कांगड़ा में पुलिस की कार्रवाई चिट्टा तस्करी के खिलाफ लगातार जारी है। चिट्टा की डिमांड बढ़ी है और युवा इस ओर आकर्षित हो रहे हैं, यह चिंतनीय विषय है। चिट्टा के साथ पकड़े कुछ युवाओं ने कबूला है कि अकेलापन और थ्रिलर करने की चाह में उन्होंने इसका सेवन शुरू किया था। ऐसे युवाओं की पुलिस भी काउंसलिंग कर रही है। - शालिनी अग्निहोत्री, एसपी कांगड़ा
परिजन दोस्ती जैसा माहौल रखें, प्यार से सुनें बच्चों की बात : डॉ. अनुराधा
धर्मशाला अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराधा शर्मा का कहना है कि परिवार में बच्चों के साथ दोस्तों जैसा माहौल रखना चाहिए और वे कुछ बताना चाहते हैं तो शांतिपूर्वक और प्यार से उनकी बात सुनें। बच्चे परिजनों को अपना दोस्त समझ सकें और गलत संगत में न आएं। 12 से 16 वर्ष की उम्र में काफी बदलाव होते हैं, इस दौरान बच्चों में जिज्ञासा होती है और वह गलत कदम भी उठाते हैं। ऐसे में परिजनों को बच्चे के व्यवहार पर भी नजर रखनी चाहिए।