धर्मशाला। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर दौड़ते वाहनों से निकलने वाला काला धुआं हवा में जहर घोल रहा है। आलम यह है कि सड़कों पर चलने वाले राहगीरों के लिए इन वाहनों के पास से गुजरते ही सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। वाहनों से निकलने वाला यह धुआं न केवल पर्यावरण को दूषित कर रहा है, बल्कि लोगों के लिए बीमारियों का खतरा भी पैदा कर रहा है।
स्थानीय निवासी रमेश कुमार, संजीव कुमार, लेख राज, बबलू, राज कुमार और अश्वनी आदि ने बताया कि जैसे ही ये वाहन पास से गुजरते हैं, तो घना काला धुआं पूरे चेहरे और फेफड़ों में भर जाता है। धुएं के कारण आंखों में तेज जलन और घुटन महसूस होती है। कई बार दृश्यता कम होने से चालकों को सामने का रास्ता नहीं दिखता, जिससे हादसे का भी अंदेशा बना रहता है। लोगों ने मांग की है कि ऐसे प्रदूषणकारी वाहनों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाकर उन्हें सड़कों से हटाया जाए।
सेहत और सुरक्षा पर मंडराता खतरा
वाहनों से निकलने वाला घना काला धुआं स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए बेहद घातक है। धुएं में मौजूद बारीक कण अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के संक्रमण का कारण बन रहे हैं। धुआं छोड़ते हुए जब वाहन पास से गुजरते हैं तो राहगीरों को अचानक सिरदर्द, आंखों में पानी आना, चक्कर आना और घुटन की समस्या होती है। बच्चों और बुजुर्गों में त्वचा और नाक की एलर्जी तेजी से बढ़ रही है। धुएं के गुबार के कारण सड़कों पर विजिबिलिटी कम हो जाती है, जो सड़क दुर्घटनाओं को न्योता देती है।
गाड़ियों से निकलने वाला धुआं शरीर के लिए जहर के समान है। इससे बचने के लिए सड़क पर निकलने से पहले राहगीरों को मास्क पहनना चाहिए। अब समय आ गया है कि लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दें। -डॉ. धीरज कपूर, एचओडी मेडिसिन, टांडा
विभाग समय-समय पर धुआं छोड़ने वाले वाहनों के चालान करता है। प्रदूषण को लेकर सभी वाहनाें के अलग-अलग मानक होते हैं। जो वाहन तय मानकों पर खरे नहीं उतरते, उनके प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाते। -विकास जमवाल, आरटीओ धर्मशाला