विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया।
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केंद्र सरकार के हाल ही में पेश किए गए आम बजट को लेकर प्रदेश की राजनीति में तीखी बयानबाज़ी तेज हो गई है। फतेहपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से रूबरू होते हुए फतेहपुर के विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष (कैबिनेट रैंक) भवानी सिंह पठानिया ने बजट को हिमाचल विरोधी बताते हुए केंद्र सरकार के साथ-साथ प्रदेश के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को सीधे तौर पर घेरा।
'आरडीजी नहीं तो कैसे चलेगा पहाड़ी राज्य?'
भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि 16वें वित्त आयोग द्वारा हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे और पहाड़ी राज्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की सिफारिश न करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हिमाचल का 67 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वन एवं पारिस्थितिक आवरण से घिरा है, पहाड़ी क्षेत्रों में सेवाएं देने की लागत अधिक है और बीते वर्षों में राज्य को 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्राकृतिक आपदा नुकसान झेलना पड़ा है, फिर भी केंद्र ने राज्य को इस अहम सहारे से वंचित रखा।
'दिल्ली की चिट्ठी के आगे झुकी प्रतिनिधित्व की आवाज'
पठानिया ने सांसदों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रदेश के लोकसभा और राज्यसभा सांसद हिमाचल के प्रतिनिधि कम और दिल्ली के संदेशवाहक अधिक नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि सांसद वही बोलते हैं, जो दिल्ली से लिखकर चिट्ठी आती है, जबकि प्रदेश आपदाओं से जूझ रहा है,आर्थिक संकट गहराता जा रहा है और जनता अपने अधिकारों की आवाज़ संसद तक पहुंचाने की उम्मीद लगाए बैठी है। पठानिया ने कहा कि अगर सांसद हिमाचल के हक़ में मजबूती से खड़े नहीं हुए तो इतिहास उन्हें इस चुप्पी और उदासीनता के लिए जरूर याद रखेगा।