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मन को विषय-विकारों से मुक्त किए बिना भजन संभव नहीं : शास्त्री

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नीलकंठ महादेव मंदिर,हार में  सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर आयोजित हवन में आहुतियां ड
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परागपुर (कांगड़ा)। नीलकंठ महादेव मंदिर हार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ और भंडारे के साथ भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुई। इस दौरान सैकड़ों भक्तों ने सहभागिता की और भक्ति का रसपान किया। कथाव्यास पंडित सुमित शास्त्री ने कथा का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि मन को विषय-विकारों से मुक्त किए बिना भगवान का सच्चा भजन संभव नहीं है।
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सत्संग ही वह पवित्र साधन है, जो मनुष्य को अच्छे-बुरे का विवेक प्रदान करता है। जब तक संसार के भौतिक पदार्थों के प्रति आसक्ति बनी रहती है, तब तक भक्ति और सत्संग में रुचि नहीं जागती। विषयों का चिंतन मन को सन्मार्ग से भटकाता है और आत्मा को भवसागर में डुबोता है। पंडित सुमित शास्त्री ने राजा परीक्षित की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि तक्षक के डसने से पहले ही भागवत कथा के श्रवण और भगवान के चिंतन से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो गई। कथा भक्तों को यह संदेश देती है कि भागवत भक्ति ही जीवन का परम लक्ष्य है। इस आयोजन में सौरभ शर्मा, सुनील कुमार, हरिदत्त शर्मा, विनोद राणा, जीवन लता, अक्षिता, प्रवीण कुमारी और भारती सहित अनेक भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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