कांगड़ा जिले के गगल स्थित एयरपोर्ट के आसपास करोड़ों रुपये की भूमि खरीद मामले में अब बेनामी संपत्ति की संलिप्तता को लेकर विजिलेंस ने जांच तेज कर दी है। जम्मू मूल के परिवार की ओर से जाली कृषक प्रमाणपत्र के दम पर अंजाम दिए गए इस घोटाले में पैसों के वास्तविक स्रोतों का पता लगाने के लिए विजिलेंस ब्यूरो रजिस्ट्री के दौरान हुए लेन-देन के बैंक खातों को खंगाल रही है। इसके साथ ही विजिलेंस ने घोटाले के समय तैनात रहे तत्कालीन राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची संबंधित विभाग से मांगी है।
विभाग से रिकॉर्ड मिलते ही संबंधित अधिकारियों को पूछताछ के लिए विजिलेंस दफ्तर तलब किया जाएगा। एसआईटी की जांच के अनुसार आरोपी परिवार ने अक्तूबर 1998 में धारा 118(2) के तहत भूमि खरीदी थी, जिसके तहत क्रेता (खरीददार) गैर-कृषक ही रहता है। जांच में सामने आया कि यद्यपि म्यूटेशन में धारा 118 (2)(डीडी) के तहत खरीद दर्ज थी। मगर तत्कालीन पटवारी और कानूनगो ने मिलीभगत कर जमाबंदी से गैर-कृषक वाली अनिवार्य टिप्पणी को जानबूझकर हटा दिया। इसी चूक का फायदा उठाकर आरोपी ने फर्जी कृषक प्रमाण पत्र बनवाए और गगल एयरपोर्ट के समीप अपने नाम 61.84 कनाल और पत्नी के नाम 44.43 कनाल कृषि भूमि खरीद ली।
आरोपी की बहन ने भी इसी तरीके से जमीन खरीदकर बाद में अपने पिता के नाम हस्तांतरित कर दी। फिलहाल विजिलेंस धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत मामले की विस्तृत जांच कर रही है। इसके अलावा खरीद-फरोख्त के लिए धनराशि के स्रोतों को भी खंगाल रही है।