जसूर (कांगड़ा)। विटेक्स नेगुंडो, जिसे हिंदी में निर्गुंडी और पहाड़ी क्षेत्रों में बणा कहा जाता है, महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है। यह भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में विशेष स्थान रखता है। यह झाड़ीदार पौधा सामान्यतः दो से पांच मीटर तक ऊंचा होता है और कम देखभाल में भी तेजी से बढ़ता है। इसके पत्ते, फूल, जड़ और बीज औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। निर्गुंडी में सूजनरोधी, दर्दनाशक, जीवाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं।
धर्मशाला निवासी एवं चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के औषधीय पौध विशेषज्ञ डॉ. मुनीश कौंडल ने बताया कि आयुर्वेद में इसके पत्तों का काढ़ा जुकाम, खांसी, बुखार, सिरदर्द, गठिया और जोड़ों के दर्द में उपयोगी माना जाता है। इसके पत्तों का लेप सूजन कम करता है। तेल जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में राहत देता है। यह त्वचा रोग, घाव, अस्थमा और पाचन संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी है।
निर्गुंडी का तेल बाल झड़ने, रूसी और सिर की त्वचा संबंधी समस्याओं को कम करने में सहायक है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसके पत्तों का धुआं मच्छरों को भगाने के लिए प्रयोग किया जाता है। कृषि क्षेत्र में भी निर्गुंडी के अर्क का उपयोग प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में किया जाता है। इसकी जड़ें मिट्टी संरक्षण और भूस्खलन रोकने में सहायक हैं। निर्गुंडी स्वास्थ्य, पर्यावरण और कृषि के लिए वरदान है। इस बहुपयोगी पौधे का संरक्षण और संवर्धन समय की आवश्यकता है।