हरिपुर सोसायटी के मछुआरे द्वारा पकड़ी गई मछली। -स्रोत : जागरूक पाठक
नगरोटा सूरियां/बरियाल/हरिपुर/फतेहपुर (कांगड़ा)। पौंग झील में मछली पकड़ने पर दो माह का प्रतिबंध शनिवार को समाप्त हो गया। मछली के शौकीन दो महीने बाद अब पौंग झील की स्वादिष्ट मछली का जायका ले सकेंगे। प्रतिबंध हटते ही मछुआरों की किस्मत चमक उठी और पहले दिन ही झील से 17806.4 किलोग्राम मछली पकड़ी गई। यह पिछले साल के मुकाबले 1406 किलोग्राम अधिक है।
नगरोटा सूरियां क्षेत्र में सबसे ज्यादा 3346.4 किलोग्राम मछली पकड़ी गई। इसी क्षेत्र के राकेश कुमार ने 12 किलो की कतला प्रजाति की मछली पकड़ी, जबकि अमन नामक मछुआरे ने 167 किलो मछलियां एक दिन में पकड़ी। सबसे बड़ी मछली कतला प्रजाति की 26.3 किलो की रही।
मत्स्य सहायक निदेशक विवेक शर्मा ने बताया कि इस बार झील में सिंगाड़ा प्रजाति की मछली सबसे अधिक मिली, जिसकी मात्रा 9834.9 किलोग्राम रही। झील में कुल 15 मत्स्य सहकारी सभाएं कार्यरत हैं और करीब 2600 मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य करते हैं।
कहां पकड़ी कितनी मछली
फिशरी सोसायटी में देहरा 1611.4 किलोग्राम, हरिपुर में 2715.2 किलोग्राम, नंदपुर में 2631.6 किलोग्राम, नगरोटा सूरियां में 3346.4 किलोग्राम, हरसर में 942.7 किलोग्राम, जवाली में 395.6 किलोग्राम, गुगलाड़ा में 1186.7 किलोग्राम, सिहाल में 1103.6 किलोग्राम, धमेटा में 1385.2 किलोग्राम, खटियाड़ में 1085.3 किलोग्राम, स्थाना में 152.6 किलोग्राम, बरनाली में 625.9 किलोग्राम और स्यूल खड्ड, डाडासीबा और जाम्बल में कुल 524.2 किलोग्राम मछली पकड़ी गई।