गोहर (मंडी)। प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में अपर्याप्त बारिश और बर्फबारी के कारण सेब के बगीचों में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। दिसंबर शुरू होने के बावजूद सूखे की स्थिति बनी हुई है। इससे बागों में पौधों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है। मंडी जिला में प्रतिवर्ष लगभग 35 लाख सेब पेटी का कारोबार होता है। मगर आगामी सीजन को लेकर बागवानी विशेषज्ञ और बागवानों में चिंता पैदा हो गई है।
बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार सेब की बेहतरीन फसल के लिए 1600 घंटे के चिलिंग आवर्स (ठंडा तापमान) का होना बेहद जरूरी होता है। मौजूदा सूखे के हालात के कारण यह आवश्यकता पूरी नहीं हो पा रही है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि यह सूखा जारी रहा तो अप्रैल में होने वाली महत्वपूर्ण सेब फ्लावरिंग (फूल खिलने की प्रक्रिया) पर संकट छा सकता है। इससे पूरी फसल प्रभावित होगी।
बागवानों चंद्रमणि, यशवंत, घनश्याम, मनोज, लाभ सिंह, प्रेम ठाकुर, हेमराज, दीनानाथ, परमा, हेम सिंह, लीला प्रकाश, दुष्यंत,जीत कुमार, सुरेंद्र और प्रकाश ठाकुर ने बताया कि बारिश और बर्फबारी न होने से सेब बगीचों में नए पौधे लगाने और बागवानी संबंधी अभी कार्य ठप हो गए हैं। करसोग, चुराग, पांगणा, ठंडा पानी, चरखडी, झूंगी, रोहांडा, कमांद, निहरी, शकोहर, थमाड़ी, बाढु, कुटाहची, सरोआ, फंग्यार, जहल, सलाहर, कांढ़ा, बगस्याड़, थुनाग, जंजैहली, छतरी, थाची और पंजाई समेत जिला के द्रंग इलाके में सेब के बगीचे हैं।
लंबे समय से नमी की कमी के कारण सेब के पौधे पहले ही वूली एफिड, पेपरी बार्क और केंकर जैसी बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। बागवानों का कहना है कि बारिश और बर्फबारी न होने से उनके बगीचों में नए पौधे लगाने और बागवानी संबंधी सभी आवश्यक कार्य ठप हो गए हैं। कई बागवान अब देवालयों की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
सूखे से बनी स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने कहा है कि इस समय सेब बगीचों को बेहद नमी की जरूरत है। अभी भी बारिश हो जाती है तो अप्रैल में होने वाली फ्लावरिंग के लिए अच्छे संकेत मिल सकते हैं।