जसूर (कांगड़ा)। गर्भावस्था के दौरान खून की कमी एक आम समस्या है, जो जच्चा और बच्चे दोनों के लिए गंभीर खतरे का कारण बन सकती है। नूरपुर सिविल अस्पताल में तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज हीर ने बताया कि लगभग 40-50 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं इस समस्या से जूझ रही हैं, और इसका समय रहते इलाज करना बेहद जरूरी है।
डॉ. पंकज के अनुसार, खून की कमी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी-12, और प्रोटीन की कमी। इसके अलावा रक्त स्राव, पेट में कीड़े, मलेरिया, टीबी, किडनी की समस्या और रक्त कैंसर भी खून की कमी का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था में आयरन की आवश्यकता बढ़ जाती है, लेकिन महिलाओं में पहले से ही आयरन की कमी हो सकती है, और गर्भावस्था में खाने की इच्छा कम होने के कारण हीमोग्लोबिन का स्तर गिर जाता है।
लक्षण : खून की कमी के लक्षणों में सांस की तकलीफ, थकान, कमजोरी, घबराहट, चक्कर आना और आंखों में अंधेरा आना शामिल हो सकते हैं। इस समस्या का इलाज देर से करने से गर्भावस्था पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं, जैसे संक्रमण का बढ़ना, हृदय रोग, रक्त स्राव का जोखिम, और बच्चे को दूध की कमी होना।
ये हैं बचाव के उपाय
आयरन और प्रोटीन से भरपूर आहार, जैसे हरी सब्जियां, मीट, अंडे, हरे मटर, प्याज के हरे डंठल, और गुड़ का सेवन रक्त की कमी को रोक सकता है। डॉ. पंकज ने कहा कि आयरन की गोलियों की खुराक बढ़ाई जा सकती है, और यदि गोलियां सूट नहीं करतीं, तो उनका ब्रांड बदलने की सलाह दी जा सकती है। बहुत अधिक रक्त की कमी होने पर रक्त चढ़ाने की भी आवश्यकता हो सकती है। गर्भावस्था में समय पर उपचार और उचित आहार से खून की कमी को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों की सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।