नूरपुर (कांगड़ा)। हालात कितने भी मुश्किल हों, अगर जज्बा हो तो इंसान अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाता हैं। यह बात नूरपुर शहर के वार्ड तीन के चाय की दुकान चलाने वाले सुनील कुमार उर्फ टाटा पर बिलकुल सटीक बैठती हैं। वह 55 साल की उम्र में भी विपरीत परिस्थितियों के बाद भी बैडमिंटन रैकेट थामे हुए हैं। बैडमिंटन के प्रति सुनील टाटा का जनून आज की युवा पीढ़ी के लिए किसी मिसाल से कम नहीं हैं। वह 19 मार्च से गोवा में शुरू होने वाली राष्ट्रीय स्तरीय मास्टर वेटरन बैडमिंटन प्रतियोगिता के 55 प्लस आयु वर्ग में खेलेंगे। 24 फरवरी को नाहन में आयोजित राज्य स्तरीय मास्टर वेटरन बैडमिंटन प्रतियोगिता में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया था। इस प्रदर्शन के चलते उनका चयन नेशनल के लिए हुआ है। चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का गुजारा करने वाले सुनील कुमार को इस बात का मलाल है कि आज दिन तक उन्हें कोई भी मदद मिलना तो दूर की बात है उल्टा जिला और राज्यस्तरीय प्रतियोगिता से लेकर नेशनल तक खेलने के लिए अपनी जेब से ही खर्च उठाना पड़ रहा है।
जिला बैडमिंटन एसोसिएशन ने सिर्फ एक ट्रैक सूट दिया हैं लेकिन स्टेट बैडमिंटन एसोसिएशन से आज दिन तक कोई मदद नहीं मिल पाई है। सुनील बताते हैं कि पहले करीब 11 साल तक प्राइवेट जॉब करने के बाद नूरपुर सिविल अस्पताल में एक्स रे विभाग में नौकरी लगी थी। लगभग 12 साल तक एक्स रे टेक्नीशियन का काम करने के बाद स्वास्थ्य विभाग का किसी कंपनी के साथ एमओयू होने के चलते उन्हें नोटिस जारी कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। बावजूद इसके उनका बैडमिंटन के प्रति जनून कम नहीं हुआ। डगमगाते आर्थिक हालात में भी उन्होंने खेल जारी रखा। सुनील अभी बीडीओ ऑफिस के बाहर चाय की दुकान चलाते हैं। साथ ही रोजाना दो घंटे नूरपुर स्थित बैडमिंटन हाल में अभ्यास करते हैं।
बिना कोचिंग हासिल किया मुकाम
सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने बैडमिंटन के लिए किसी प्रकार की कोई कोचिंग भी नहीं ली है। बैडमिंटन के साथ क्रिकेट के भी आल राउंडर खिलाड़ी रहे हैं। इन दिनों वह नेशनल की तैयारी में जुटे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से 19 मार्च को गोवा में शुरू होने वाली नेशनल मास्टर वेटरन बैडमिंटन चैंपियनशिप खेलने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की अपील की है।