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Kangra News: पति की मौत के बाद खुद परिवार की ताकत बनीं दीपिका

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टांडा के मसल की दीपिका।
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धर्मशाला। दस साल पहले हुई पति की मौत के बाद दीपिका ने हिम्मत नहीं हारी। वह किसी दूसरे पर निर्भर न होकर खुद अपने परिवार की ताकत बनीं। दीपिका ने स्वयं अपने तीनों बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर अपने पैरों पर खड़ा करने लायक बना दिया है। दीपिका टांडा मसल पंचायत के वार्ड तीन की रहने वाली हैं। उनके तीन बच्चे दो बड़ी लड़कियां और एक लड़का है। इनमें से बड़ी लड़की की शादी कर दी है। वहीं, लड़के को एमबीए और एचएम की पढ़ाई करवाकर खुद कमाने लायक बना दिया है। दीपिका स्वयं भी 40 हजार से लेकर एक लाख रुपये प्रति माह कमा रही हैं।
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यही नहीं, उन्होंने चार महिलाओं सहित एक पुरुष को भी रोजगार दिया है। दीपिका ने बताया कि उनके पति की मौत मस्तिष्क रक्तस्राव बीमार से 2015 में हो गई थी। पति का साथ छूटने के बाद दीपिका की आर्थिक परिस्थितियां कमजोर हो गईं। 2018 में टिफिन सर्विस कर समय गुजारा। जान पहचान बनने के बाद वह ब्लॉक कार्यालय से लॉकडाउन के दौरान स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्होंने अचार सहित अन्य उत्पाद तैयार करना शुरू किए। कुछ समय स्वयं सहायता समूह के साथ काम करने के बाद 2021 में राजीव गांधी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में कैंटीन चलाना शुरू की। कैंटीन में वह कांगड़ी धाम, रागी और मूंगी का चीला, बकव्हीट की कड़ी, रागी के सिड्डू सहित मोटे अनाज के उत्पाद बनाने लगीं। उन्होंने कहा कि कैंटीन में विद्यार्थियों को मोटे अनाज में काफी दिलचस्पी है और काफी विद्यार्थी खाना पसंद करते हैं।

विभाग के मेलों में भी लेती हैं भाग
दीपिका ने कहा कि वह विभागों की ओर से जिले में मोटे अनाज को प्रोमोट करने के लिए लगाए जाने वाले मेलों में भाग लेती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल उन्होंने शिमला में स्टॉल लगाकर कांगड़ी धाम को प्रोमोट किया था और आगे भी करती रहेंगी। इसके साथ ही उनके मोटे अनाज के सिड्डुओं की भी काफी मांग है।
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