कांगड़ा। भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ जिला कांगड़ा के अध्यक्ष बलराम पुरी ने जारी प्रेस बयान में कहा कि सरकार कर्मचारियों एवं पेंशनरों की लंबित वित्तीय देनदारियों पर अभी भी टालमटोल कर रही है। हर विभाग का कर्मचारी और पेंशनर तीन प्रतिशत डीए किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा। सरकार देय (लंबित) चार प्रतिशत किस्त की अधिसूचना जारी करे। तीन प्रतिशत की आड़ में सरकार देय क्रमागत ( चार-चार) प्रतिशत किस्तों को हमेशा के लिए खत्म करना चाहती है। वर्ष 2016 से जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए लगभग 42 हजार कर्मचारियों को उनके देय ग्रेच्युअटी, कम्यूटेशन लीव इन्कैशमेंट, संशोधित पेंशन एरियर एवं चिकित्सा बिलों आदि को दबाकर अपना आर्थिक स्वार्थ साध रही है। सरकार को विधायकों और अध्यक्षों की वेतन वृद्धि, मित्र मंडली पर करोड़ों रुपये प्रतिमाह खर्च करने पर आर्थिक आपदा नजर नहीं आती है। दूसरी ओर परिवहन निगम, कार्पोरेट सेक्टर और बिजली बोर्ड के कई कर्मचारी न तो अभी पेंशनर बन सके और न ही उन्हें ओपीएस के अंतर्गत लाया जा सका है। संवाद