धर्मशाला/कांगड़ा। आपदा के दौरान विद्यालयों को अधिक सुरक्षित बनाने और संभावित जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रशिक्षण केंद्र छेब (कांगड़ा) में सोमवार से तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। शिविर में कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना और चंबा जिलों के कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता, तकनीकी सहायक और विभिन्न एनजीओ के करीब 40 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से स्कूल सुरक्षा ऑडिट और गैर-संरचनात्मक आकलन पर केंद्रित है, ताकि विद्यालयों में संभावित खतरों की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुधार किए जा सकें। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की ‘हिमाचल प्रदेश में आपदा जोखिम प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना’ परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है।
इसे राज्य और संबंधित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में प्रशिक्षण केंद्र की प्राचार्य दीपाली शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को स्कूल सुरक्षा मानकों, जोखिम मूल्यांकन और सुरक्षित परिसर विकसित करने के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
बदलती परिस्थितियों में विद्यालयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रशिक्षण से मैदानी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी, जिससे आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी। -अमित तुतेजा, राज्य परियोजना अधिकारी, यूएनडीपी