धर्मशाला। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीन दिवसीय भारत दौरे का मैकलोडगंज स्थित निर्वासित तिब्बत सरकार ने दबे स्वर से, जबकि तिब्बतियन यूथ कांग्रेस ने खुलकर विरोध किया। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डा. लोबसंग सांग्ये ने संसद में चीनी राष्ट्रपति के दौरे को आशावादी बताने के साथ तिब्बत में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चीन सरकार को घेरा।
उन्होंने निर्वासित तिब्बत सरकार की ओर से शी जिनपिंग का दबी जुबान में विरोध जताया। तिब्बतियन यूथ कांग्रेस ने दिल्ली में दो दिन तक चीनी राष्ट्रपति के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को पुलिस को गिरफ्तार करना पड़ा। तिब्बतियन यूथ कांग्रेस का मुख्यालय मैकलोडगंज में है। यहीं से यूथ कांग्रेस ने आजादी का बिगुल बजाया है। देश के हर कोने से दिल्ली पहुंचकर टीवाईसी कार्यकर्ताओं ने चीनी राष्ट्रपति का विरोध किया। मैकलोडगंज से पांच पदाधिकारी रवाना हुए थे। देश भर से सैकड़ों प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंचे थे।
ताज पैलेस के बाहर प्रदर्शन
तिब्बत यूथ कांग्रेस की अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं सूचना सचिव शेवांग डोलमा के मुताबिक शुक्रवार को ताज पैलेस के बाहर कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। 22 सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वीरवार को विरोध कर रहे आरटीवाईसी रोहिनी चैप्टर के 10 टीवाईसी एक्टिविस्ट को गिरफ्तार किया था। इन्हें आधी रात को छोड़ा गया। शुक्रवार को शी जिनपिंग की भारतीय अधिकारियों के साथ ताज पैलेस में बैठक थी। इसको लेकर टीवाईसी कार्यकर्ताओं ने ताज पैलेस के बाहर प्रदर्शन किया।
निर्वासित सरकार, टीवाईसी के मार्ग अलग : रिंपोंछे
निर्वासित तिब्बत सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री सामदोंग रिपोंछे ने दिल्ली से फोन पर बताया कि हम प्रजातंत्र की प्रणाली में जी रहे हैं। प्रजातंत्र में हर किसी को अपने विचार रखने का अधिकार है। निर्वासित तिब्बत सरकार सहित 80 प्रतिशत तिब्बतियन आबादी तिब्बत मसले का हल मध्य मार्ग नीति के जरिये चाह रही है। तिब्बत यूथ कांग्रेस का मत हमेशा निर्वासित सरकार से अलग रहा है। टीवाईसी का मार्ग अलग है। दोनों अपने-अपने मार्ग से काम कर रहे हैं।