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खून में शुगर कम होना घातक

Mon, 09 Dec 2013 05:45 AM IST
Kangra
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धर्मशाला। लंबे समय से मां का दूध न पिलाने पर नवजात शिशु के शरीर में शुगर की मात्रा लगातार कम होने लगती है। शिशु के खून में शुगर की मात्रा 40 एमजी तक होनी चाहिए। जन्म के बाद लापरवाही के कारण अकसर बच्चे को दूध देरी से पिलाया जाता है। इससे शुगर की मात्रा कम होने लगती है। इससे शिशु सुस्त हो जाता है। वह गहरी नींद में रहता है। लापरवाही होने पर बच्चे की जान पर भी बन सकती है। चिकित्सकों के अनुसार जन्म के बाद बच्चे को आधे घंटे बाद मां का दूध पिलाना जरूरी होता है। इससे खून में शुगर की मात्रा सामान्य रहती है। शुगर कम होने पर एंटी बायोटिक दवाई ग्लूकोज के साथ बच्चे के शरीर में चढ़ानी पड़ती है। इससे दो से तीन दिन के बाद ही शुगर सामान्य हो पाता है। बाद में भी बच्चे को मां का दूध पिलाने की ही सलाह दी जाती है। इसके बाद ही बच्चा फिर से चुस्त होने लगता है।
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क्षेत्रीय अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. सुनील दत्ता ने बताया कि मां का दूध न पिलाने से शिशु के खून में शुगर की मात्रा कम हो सकती है। इससे शिशु सुस्त हो सकता है। शुगर में कमी आने से बच्चे की जान भी खतरे में पड़ सकती है। जन्म के बाद मां अपने बच्चे को आधे-आधे घंटे बाद दूध जरूर पिलाए।

कैसे होता है खून में शुगर कम
शिशु के शरीर में 40 एमजी शुगर होना चाहिए। नवजात को दूध न पिलाने से शुगर की मात्रा कम होकर 20 एमजी तक पहुंच जाती है। शुगर की यह कम मात्रा शिशु के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। मां का दूध पिलाने से शुगर सामान्य रहता है। इससे बच्चा तंदुरुस्त रहता है।
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