देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। सिविल अस्पताल देहरा को एफआरयू का दर्जा तो मिल चुका है। लेकिन, अब भी यह संस्थान मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। एफआरयू का दर्जा मिलने के बावजूद यहां पर कोई विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद नहीं। इसके चलते लोगों को इलाज के लिए दूसरे जिलों या फिर पंजाब के अस्पतालों में जाकर महंगे दामों पर इलाज करवाना पड़ रहा है।
उपमंडल देहरा की आबादी तीन लाख से ऊपर जा पहुंची है। हैरानी की बात है कि एफआरयू देहरा में सालाना एक लाख के ऊपर ओपीडी है। लेकिन यहां पर स्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन, निश्चेतन विशेषज्ञ व ईएनटी विशेषज्ञ के पद खाली हैं। इस समय एफआरयू में आठ डाक्टर मौजूद हैं। इनमें से एक डाक्टर को डेपुटेशन पर भेजा गया है। जबकि एक डाक्टर इमरजेंसी ड्यूटी पर रहता है। साथ ही आए दिन कुछ डाक्टरों की ड्यूटी पोस्टमार्टम तथा कोर्ट केस आदि में लगी होती है। रोजाना की ओपीडी लगभग 400 के करीब है। यहां सर्जन के न होने पर नसबंदी के दो कैंपों को रद करना पड़ा। साथ ही सर्जन न होने से आपरेशन थियेटर भी बंद पड़ा है। इससे लाखों की मशीनरी धूल फांक रही है। अस्पताल में फार्मासिसटों की भी कमी है। पूर्व में 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में सभी सुविधाएं उपलब्ध थीं। परंतु एफआरयू का दर्जा मिलते ही इसे पचास बेड का कर दिया और यहां पर मौजूद सुविधाओं में भारी कटौती हो गई।
एसएमओ डा. गुरमीत सिंह ने माना कि एफआरयू देहरा में विशेषज्ञ डाक्टरों की बड़ी कमी चल रही है। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकरियों को पहले ही अवगत करवाया जा चुका है। उधर, राज्य मार्केटिंग कमेटी के उपाध्यक्ष व पूर्व राज्यसभा सदस्य कृपाल परमार ने कहा कि इस समस्या से वे अवगत हैं। दावा किया कि पंद्रह मई के बाद एफआरयू देहरा में विशेषज्ञ डाक्टरों सहित सभी पदों को भर दिया जाएगा।