बैजनाथ (कांगड़ा)। कांगड़ा घाटी रेलवे ट्रैक पर भाप इंजन की छुक-छुक के फिर से गूंजने को लेकर संशय की स्थिति है। इंजन ट्रैक पर चढ़ाई चढ़ने में सक्षम नजर नहीं आ रहा है। मंगलवार को पठानकोट से भाप इंजन को पपरोला रेलवे स्टेशन में पहुंचा दिया गया है।
जानकारी के अनुसार भाप इंजन पपरोला-पठानकोट के रेलवे ट्रैक पर आने वाली चढ़ाई को चढ़ने में कमजोर साबित हो रहा है। मंगलवार को पपरोला में भाप इंजन को डीजल इंजन की सहायता से ही पहुंचाया जा सका है। दो सप्ताह पूर्व पठानकोट से नूरपुर तक भाप इंजन को लाया गया था। उसके बाद के ट्रैक पर इंजन अपने बलबूते आगे बढ़ने में सफल नहीं हो सका था। अब इस भाप इंजन को नूरपुर से डीजल इंजन के सहयोग से पपरोला तक लाया जा सका है। पूर्व में चलने वाले भाप इंजनों को डीजल इंजन आने पर बंद कर दिया गया था। कुछ वर्ष पूर्व कांगड़ा घाटी के रेलवे ट्रैक को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए भाप इंजन को ट्रायल के तौर पर ट्रैक पर चलाया गया था। लेकिन, यह प्रयोग अब तक सफल नहीं हो सका है। पिछले साल इंग्लैंड रेलवे के प्रतिनिधियों ने पपरोला पठानकोट रेलवे ट्रैक पर सफर करके भाप इंजन को पर्यटन की दृष्टि से शुरू करने की सिफारिश की थी। आगामी दिनो में भाप इंजन के ट्रायल के सफल रहने पर घाटी के पर्यटन को चार चांद लग सकते हैं। पपरोला रेलवे स्टेशन के अधीक्षक रमेश ने बताया कि भाप इंजन को पपरोला में लाया गया है। इसको ट्रैक पर शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।