धर्मशाला। महिलाओं के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की शिकार पीड़िताओं को त्वरित राहत प्रदान करने में वन स्टॉप सेंटर काफी मददगार साबित हो रहा है। पिछले चार महीनों के दौरान सेंटर में कुल 84 मामले दर्ज किए गए। इनमें से अधिकांश मामलों का निपटारा कानूनी पचड़ों के बजाय काउंसलिंग और आपसी समझाइश के जरिए किया गया, जबकि केवल एक गंभीर मामले में ही कानूनी कार्रवाई की गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 40 महिलाओं का मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) किया गया, जबकि संकट में घिरी 9 महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर अस्थायी आश्रय प्रदान किया गया। इसके अलावा 39 महिलाओं को तत्काल पुलिस सहायता तथा दो को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई गई।
विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर का मुख्य ध्येय घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन अपराध या किसी भी प्रकार के संकट से जूझ रही महिलाओं को एक ही छत के नीचे तमाम सुविधाएं देना है। यहां 24 घंटे कानूनी सलाह, पुलिस समन्वय, चिकित्सा और आश्रय सुविधा उपलब्ध है।
महिला हेल्पलाइन के जरिए मिली शिकायतों में कई मामलों को समय पर परिवार के साथ समन्वय बिठाकर सुलझा लिया गया, जिससे कोर्ट-कचहरी की नौबत नहीं आई। हालांकि, जहां मामला गंभीर था या पीड़िता ने चाहा, वहां नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई गई।