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स्वाइन फ्लू से सतर्क रहें, घबराएं नहीं

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स्वाइन फ्लू से घबराएं नहीं, सतर्क रहें
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बीमारी के मामले बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को किया सचेत
बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, शुगर एवं दमे के मरीज ज्यादा सचेत रहें
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सावधानी बरतने और सचेत रहने की सलाह दी है। विभाग ने धर्मशाला से एडवाइजरी जारी कर कहा कि जिला में स्वाइन फ्लू से बीमार होने के कुछ मामले आ रहे हैं। इसमें बेशक सतर्क रहने की आवश्यकता है, लेकिन इसमें घबराने की कोई जरूरत नहीं है। थोड़ी सी एहतियात बरतने पर स्वाइन फ्लू से बचा जा सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि स्वाइन फ्लू एक प्रकार का जुकाम है इसके लक्षण बुखार, खांसी, गला दुखना, नाक बहना, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और सांस लेने में तकलीफ आदि होते हैं। लेकिन, यह जरूरी नहीं कि ये लक्षण स्वाइन फ्लू के ही हों। यह सामान्य फ्लू भी हो सकता है। फिर भी इस तरह के लक्षण आने पर सचेत रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू की बीमारी विशेष प्रकार के इन्फ्लुएंजा ए वायरस (एच1एन1) से पीड़ित मरीज के संपर्क में आने से हो सकती है। विशेष तौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, शुगर एवं दमे के मरीजों को स्वाइन फ्लू होने का खतरा अधिक रहता है।
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डॉ. गुप्ता ने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों को ए, बी और सी श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी ए में वे लोग होंगे जिन्हें एच 1 एन 1 के परीक्षण की आवश्यकता नहीं है। हल्के बुखार, खांसी और गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, मितली और दस्त के रोगियों को श्रेणी ए में रखा जाता है। इस तरह के रोगियों की 24-48 घंटों तक निगरानी रखी जा सकती है। इन रोगियों को सलाह दी जाती है कि वे घर पर रहें और दूसरों के साथ घुलें-मिलें नहीं। उन्हें एच1एन1 के परीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी और ओसेल्टामिविर के साथ कोई उपचार नहीं होगा। श्रेणी बी में वे लोग होंगे, जिनके पास श्रेणी ए में उल्लिखित सभी लक्षण हैं, लेकिन उन्हें उच्च श्रेणी का बुखार है और वे उच्च जोखिम वाली श्रेणी में हैं। उन्हें ओसेल्टामिविर के साथ इलाज की आवश्यकता होगी और घर पर ही सीमित रहना होगा। उच्च जोखिम वाली श्रेणी में हल्की बीमारी वाले बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति, फेफड़े, यकृत, हृदय, गुर्दे, रक्त या न्यूरोलॉजिकल रोगों वाले रोगी शामिल हैं और वे जो दीर्घकालिक कॉर्टिसोन चिकित्सा पर हैं। श्रेणी सी में वे लोग होंगे, जिनके पास श्रेणी ए और बी के सभी लक्षण और लक्षण होंगे और उनकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना होगा। अगर मरीजों में सांस फूलना, सीने में दर्द, उनींदापन, रक्तचाप में गिरावट, रक्त के साथ बलगम मिला हुआ है, नाखूनों का नीलापन है, उन्हें तुरंत दवा पर शुरू करने और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होगी। इस श्रेणी में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी, जिसमें तेज और लगातार बुखार, माताओं में दूध पिलाने की अक्षमता, सांस लेने में कठिनाई और कठिनाई वाले बच्चे भी शामिल होंगे।

श्वसन संक्रमण को रोकने के लिए उपाय
डॉ. गुप्ता ने कहा कि समझदारी और सहयोग से काम लेने पर इसे और कम किया जा सकता है। खांसते और छींकते समय अपने मुंह और नाक को ढक कर रखें । अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह से धोएं। छींकने, खांसने और नाक पोंछने के बाद, भोजन तैयार करने से पहले और बाद में, खाना खाने से पहले और बाद में, बीमार होने वाले व्यक्ति की देखभाल करने से पहले और बाद में हाथ धोने चाहिए। यदि आप में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण पाए जाएं तो स्कूल, दफ्तर, सार्वजनिक स्थानों में जाने से परहेज करें। एक दूसरे को छूने और हाथ मिलाने से परहेज करें। संक्रमित व्यक्ति या जिसमें स्वाइन फ्लू के आशंका हो उससे 1 मीटर की दूरी पर रहें ।
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रोग को लेकर जागरूक हुए हैं लोग
उन्होंने कहा कि रोग को लेकर लोगों में जागरूकता आई है, इसलिए फ्लू के लक्षणों वाले लोग पहचान के लिए स्वास्थ्य केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं। यह भी एक कारण है कि अधिक मामलों की सूचना दी जा रही है। जिला में अब तक स्वाइन फ्लू के 18 मामले चिह्नित किए गए हैं और दो लोगों की इससे मृत्यु हुई है। गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि इस बारे में सभी अस्पतालों को दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जांच की सुविधा टांडा मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है। श्रेणी ए के मरीजों को जांच या दवाई की जरूरत नहीं होती। उन्होंने आह्वान किया कि लक्षण होने पर अस्पताल में संपर्क करें व डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवाई न लें।
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