पालमपुर (कांगड़ा)। सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान पालमपुर ने भारत सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम के तहत दो महीने का गार्डनर कोर्स शुरू किया है। घरों, पार्कों और होटलों के लिए लॉन और उद्यानों के सौंदर्यीकरण की देखभाल करने के लिए गार्डनर की जरूरत होती है। इस कोर्स में प्रशिक्षुओं को गार्डेनिंग से संबंधित तकनीकी जानकारियां दी जाएंगी।
इनमें पौधों की पहचान, उद्यान बनाए रखने, विभिन्न उपकरणों के उपयोग और तुरंत समस्या निवारण के लिए निर्णय लेने के कौशल का विकास इस प्रदर्शन कार्यक्रम में सिखाया जाएगा। इसमे लॉन, पेड़ों, झाड़ियों, मौसमी फूल और गमलों की देखभाल के बारे में सिखाया भी जाएगा। उन्हें पौधों, कीटों और बीमारियों, उनके नियंत्रण, जल निकासी की मिट्टी और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के बारे में भी जानकारियां दी जाएंगी। संस्थान के निदेशक डॉ संजय कुमार ने बताया कि गार्डनर कोर्स से युवाओं तकनीकी ज्ञान और पेशेवर कौशल में कुशल बनने की मदद मिलेगी। युवाओं को बागानों में फूलों की कलम बांधने, छंटाई, खरपतवार और कटाई में कौशल सुधार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
बुनियादी उपकरण और हाथ से संचालित मशीनों जैसे कि प्रूनर, ब्रश कटर, लॉन मोवर इत्यादि का इस्तेमाल भी इस कार्यक्रम में बताया जाएगा।
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विदेशों में भी गार्डनर की मांग : संजय
संस्थान के निदेशक डॉ संजय ने कौशल विकास कार्यक्रम को शुरू करते हुए बताया कि कौशलता प्राप्त गार्डनरस कि आवश्यकता भारत में ही नहीं। बल्कि विदेशों में भी है। इस पाठ्यक्रम को विभिन्न प्रशिक्षकों के व्याख्यान, मल्टीमीडिया एड्स, समूह चर्चा, नर्सरी के दौरे के साथ प्रशिक्षुओं को गार्डन को विकसित करने का प्रोजेक्ट करने का मौका भी दिया जाएगा।
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सेहत के लिए फायदेमंद गार्डनिंग
गार्डेनिंग से न केवल आजीविका अर्जित कर सकते हैं, बल्कि इनसे आपको स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। आजकल की कार्यशैली में निरंतर बदलाव के कारण अल्पावधि में लक्ष्यों को समय सीमा में पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। लेकिन, जब कार्य तनाव गंभीर हो जाता है, तो यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है। इस कारण तनाव, चिड़चिड़ापन, सरदर्द, रक्तचाप, अवसाद और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं आम हो रही हैं।