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पेट्रोल पंप कर्मियों से पगार के नाम पर धोखा

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पालमपुर (कांगड़ा)। पेट्रोल पंपों पर काम कर रहे कर्मचारियों का प्रदेश की कई जगहों पर पगार को लेकर शोषण हो रहा है। इन कर्मचारियों के खातों में डाले जा रहे पैसे के बाद उनसे पैसा वापस लिया जा रहा है। इसका कारण है कि केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल पंपों पर लगे कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 12 हजार रुपये हर माह निर्धारित किया गया है। लेकिन, इन कर्मचारियों को यह पैसे पूूरे नहीं मिल रहे हैं। कर्मचारियों को इस समय कई पेट्रोल पंपों पर पांच हजार रुपये तक ही वेतन मिलता है। लिहाजा, कानून के डर से पेट्रोल पंप मालिक इनके खातों में तो 12 हजार रुपये डाल रहे हैं लेकिन, बाद में इनसे सात हजार वापस ले रहे हैं, जबकि एक माह कई पेट्रोल मालिकों ने इन कर्मचारियों को 12 हजार रुपये भी दिए हैं। हालांकि, इसे लेकर मामला सुप्रीम में भी है। लेकिन, कई पेट्रोल पंप मालिक फिर क्यों पैसा पूरा डाल रहे और उनसे बाद में वापस ले रहे हैं, इसे लेकर अब पेट्रोल पंप पर लगे कर्मचारियों ने ही सवाल खड़े करना शुरू कर दिए हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक पेट्रोल कंपनियों के तय वेतन के मुताबिक कर्मचारियों को 12 हजार रुपये हर माह दिया जाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने फरमान भी जारी किए हैं। इलाके के पेट्रोल पंपों पर काम कर रहे कर्मचारियों ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उनके पैसे को लेकर शोषण हो रहा है। इसे वे अधिक दिन तक सहन नहीं कर सकते हैं।
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ऐसा है तो गलत है : अजीत
पालमपुर स्थित पेट्रोल पंप मालिक अजीत बाघला ने कहा कि अगर कोई पेट्रोल पंप मालिक ऐसा कर रहा है तो गलत है। उधर, पालमपुर में श्रम निरीक्षक सुदेश शर्मा ने कहा कि हिमाचल में तय वेतन प्रदेश सरकार के मुताबिक ही देय होता है। लेकिन, कहीं पर ऐसा हो रहा है तो उनके पास शिकायत कर सकते हैं। जबकि, प्रदेश में 220 रुपये से कम किसी की भी दिहाड़ी नहीं है।
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