नूरपुर (कांगड़ा)।
नूरपुर के ऐतिहासिक किले में श्री बृजराज स्वामी मंदिर सही रखरखाव और संरक्षण के अभाव में अपनी विशेष पहचान खो रहा है। यह विश्व का एकमात्र मंदिर है, जहां सदियों से भगवान श्रीकृष्ण के साथ प्रेम की दीवानी मीरा की मूर्तियां स्थापित हैं। राजस्थानी शैली की काले संगमरमर की मंदिर में विराजमान कृष्ण की मूर्ति आज भी कला की एक अनूठी मिसाल है। मंदिर के बाहर लगे शिलापट्ट बताते हैं कि अब जहां मंदिर है, वहां पहले कभी नूरपुर के राजा जगत सिंह का दरबार-ए-खास हुआ करता था। 1619 से 1623 के मध्य राजा जगत सिंह ये मूर्तियां चितौड़गढ़ के राजा से उपहार स्वरूप लाए थे। मंदिर की भित्तिकाओं पर कृष्ण लीलाओं का चित्रण दर्शनीय है। उचित रखरखाव के अभाव में मंदिर में निर्मित भित्ति चित्रों के अस्तित्व पर संकट है। भित्तिकाओं पर कृष्ण लीलाओं के प्रसंगों के रंग इतने धूमिल हो चुके है कि वे पहचाने भी नहीं जा सकते। श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं में कालिया मर्दन, चाघूर-मुष्टिक वध के साथ प्रल्हाद के प्रसंग और अन्य कई कथाओं से जुड़े भित्ति चित्र बने हैं। मंदिर के मेहराबों को भी सुंदर बेल-बूटों से सजाया गया है। मंदिर के निचले भाग में शेषशायी विष्णु भगवान की मूर्ति विराजमान है।
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पुजारियों के हवाले मंदिर
नूरपुर किले की पुरानी रंगत को वापस लाने के लिए पुरातत्व विभाग ने पहल तो की है, लेकिन मंदिर की दीवारों पर बने भितिचित्र इस बेजोड़ कला की अद्भुत मिसाल को कायम रखने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा सके है। यह किला पुरातत्व विभाग के कब्जे है तो श्री बृजराज मंदिर पुजारियों के हवाले। लिहाजा मंदिर के संरक्षण की किसी ने कोई जहमत नहीं उठाई। जानकार बताते है कि कांगड़ा शैली के चित्र प्राकृतिक रंगों से बनाए जाते थे, इसलिए इनमें अन्य रंग या आयल पेंट चढ़ाने से ये चित्र पूरी तरह बदरंग हो सकते हैं।
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किला पुरातत्व विभाग के अधीन
नूरपुर किला पुरातत्व विभाग के अधीन आता है। इसके चलते मंदिर के संरक्षण में पुरातत्व विभाग के कड़े नियम आड़े आ जाते हैं। बावजूद इसके मंदिर कमेटी या किसी संस्था की ओर से अगर कोई प्रपोजल आती है तो विभाग मंदिर में भितिचित्रों के संरक्षण को लेकर कुछ कर सकता है।
-राजकुमार सकलानी, जिला भाषा एवं संस्कृति अधिकारी
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