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पाठ्य सामग्री पर टैक्स से छूट, फिर भी मची लूट

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पाठ्य सामग्री पर टैक्स की छूट, फिर भी लूट
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विक्रेता प्रिंट रेट मिटा कर चिपका रहे स्टिकर, मनमर्जी के लगाए जा रहे दाम
प्रकाशकों के तय मूल्यों पर नहीं बिक रही पाठ्य सामग्री
राकेश भारद्वाज
धर्मशाला। देश में पाठ्य सामग्री पर टैक्स में भले ही केंद्र और राज्य सरकारें छूट दे रही हैं। लेकिन फिर भी पाठ्य सामग्री विक्रेताओं की ओरसे खासी लूट मचाई जा रही है। पुस्तक विक्रेताओं ने प्रकाशकों के निर्धारित प्रिंट मूल्यों के साथ ही छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया है। इससे बच्चों के अभिभावकों से पाठ्य सामग्री के दोगुने से भी अधिक दाम वसूल किए जा रहे हैं।
पुस्तक विक्रेता प्रकाशकों के निर्धारित प्रिंट रेट को मार्कर से मिटाकर उस पंच मशीन के साथ नए रेट निर्धारित कर चिपका रहे हैं। इससे बच्चों के अभिभावकों को हजारों रुपयों का चूना लग रहा है।
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बाक्स
प्रिंट मूल्यों से नहीं हो सकती छेड़छाड़
पाठ्य सामग्री पर कर में छूट दी गई है। इसके तहत प्रकाशकों के निर्धारित प्रिंट मूल्यों पर भी छूट दी जा सकती है, लेकिन पुस्तक विक्रेता छूट देने के बजाय प्रिंट रेट से भी छेड़छाड़ कर रहे हैं। कायदे से प्रकाशकों के निर्धारित मूल्यों से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।

स्कूलों की भी है मिलीभगत
कई निजी स्कूलों में पाठ्य सामग्री स्कूल परिसर में ही बच्चों को बेची जाती है, जबकि जहां यह पाठ्य सामग्री नहीं बेची जा रही। वे स्कूल बच्चों के अभिभावकों को उनके बताए हुए पुस्तक विक्रेताओं के पास से ही पाठ्य सामग्री खरीदने की हिदायत दे रहे हैं। ऐसे में स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं की मिलीभगत से अभिभावकों को खूब चपत लगाई जा रही है।
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कोट
-प्रकाशक के निर्धारित मूल्यों से अधिक पैसे नहीं वसूले जा सकते हैं। पाठ्य सामग्री वैसे भी टैक्स फ्री है। ऐसे में यदि कोई ऐसा करता है, तो उनके खिलाफ एंटी प्रोफटिंग के तहत कार्रवाई हो सकती है।
- विवेक महाजन, एईटीसी, आबकारी एवं कराधान विभाग
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