धर्मशाला। नौवीं और 10वीं के प्रश्न पत्रों में 20-30 प्रतिशत क्षमता-आधारित प्रश्न शामिल करने के निर्देश दिए गए ताकि विद्यार्थियों में रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर अवधारणात्मक एवं व्यावहारिक समझ को बढ़ावा मिल सके।
प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से तीन दिवसीय कार्यशाला में प्रश्न पत्रों की गुणवत्ता में सुधार और मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।
यह जानकारी शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के प्रश्न पत्रों की तुलनात्मक समीक्षा की गई।
पाठ्यक्रम, ब्लू प्रिंट और मार्किंग स्कीम का अवलोकन किया गया ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक संतुलित एवं पारदर्शी बनाया जा सके। परख वर्गीकरण के अनुरूप मॉडल प्रश्न पत्र तैयार करने पर विशेष बल दिया गया।