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जेओए की भर्ती में बोर्ड की ढुलमुल कार्यप्रणाली से रोष

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जेओए भर्ती में चयन आयोग
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के रवैये से अभ्यर्थियों में रोष
दो वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं निकला परिणाम
अमर उजाला ब्यूरो
रक्कड़ (कांगड़ा)। प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग की ओर से वर्ष 2016 में जेओए पोस्ट कोड 556 के लिए ली गई लिखित परीक्षा का परिणाम दो वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी नहीं निकल पाया है। इन रिक्तियों की डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन का कार्य भी करीब छह माह पूर्व संपन्न हो चुका है।
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जानकारी के अनुसार अगस्त 2018 में इस भर्ती के लिए प्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्मचारी चयन आयोग को कार्मिक विभाग की ओर से जारी किए गए स्पष्टीकरण को रद्द कर भर्ती एवं पदोन्नति नियमों का कड़ाई से पालन कर भर्ती प्रक्रिया संपन्न करने के आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के बावजूद लगभग दो महीने बाद भी चयन आयोग आजतक अंतिम परिणाम जारी नहीं कर पाया है, जिसके परिणामस्वरूप अभ्यर्थियों में रोष है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि चयन आयोग अस्पष्ट नियमों का हवाला देकर अपनी सुस्त कार्यप्रणाली पर पर्दा डाल रहा है, जबकि नियम पूरी तरफ स्पष्ट हैं और इन्हीं नियमों के आधार पर लोक सेवा आयोग, हिमाचल विश्वविद्यालय और वाईएस परमार यूनिवर्सिटी में अनेकों ऐसी नियुक्तियां हुई हैं। उन्होंने आगाह किया है कि अगर गैर मान्यता प्राप्त किसी भी कैंडिडेट का चयन इस प्रक्रिया में किया गया तो आयोग और कमेटी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अभ्यर्थियों राहुल, संजीव, सुशील, वंदना, अमित, वीरेंद्र, रीना, सुरिंद्र, पैरेज, ललिता, महिंद्र, पवन, संजय, अभिमन्यु तथा अन्यों ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि हमीरपुर स्थित चयन आयोग ने कुछ चहेतों और अपात्र लोगों को इन रिक्तियों में समायोजित करने के फेर में अस्पष्ट नियमों का हवाला देकर कमेटी का गठन करना गलत है।
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