धर्मशाला। कांगड़ा जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति के अध्यक्ष एवं सांसद शांता कुमार ने अफसरों को पठानकोट-मंडी और मटौर-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने के कार्य की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर नवंबर माह में दोनों फोरलेन के कार्य का शुभारंभ करवाने को कहा।
वह मंगलवार को धर्मशाला में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति ‘दिशा’ की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में शांता कुमार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, दीनदयाल अंत्योदय आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित दर्जनों योजनाओं के कार्यान्वयन से जुड़े सभी पहलुओं की चर्चा एवं समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ग्राम पंचायतों में बीते पांच सालों में विभिन्न योजनाओं के तहत खर्च धनराशि का विस्तृत ब्योरा 20 नवंबर तक उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। अफसर प्रत्येक विकास खंड की एक-एक पंचायत, जिसे विभिन्न मदों में सबसे अधिक धन प्राप्त हुआ है, उसे चिह्नित कर विकास कार्यों का योजनावार ब्योरा दें और उस परियोजना की आज की स्थिति के बारे में भी अगवत करवाएं। बैठक में नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया, नगरोटा बगवां के विधायक अरुण मेहरा, बैजनाथ के विधायक मुल्खराज प्रेमी, पूर्व विधायक दूलो राम ने विकास कार्यों को लोकोन्मुखी बनाने को लेकर अपने सुझाव दिए।
डमटाल में कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाने का सुझाव
उपायुक्त संदीप कुमार ने डमटाल में कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाने का सुझाव दिया, जिसकी शांता कुमार ने सराहना की। 21 और 22 नवंबर को मुल्थान में स्वास्थ्य मेला लगाया जाएगा।
सीएसआर का लाभ उठाएं
शांता ने कहा कि हिमाचल में अनेक कंपनियां अपना कारोबार कर रही हैं। कंपनी एक्ट में किए गए संशोधन के अनुरूप इन्हें अपने लाभ का दो प्रतिशत अपने सामाजिक उत्तरदायित्व (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी, ‘सीएसआर’) के तहत समाज कार्यों में लगाना अनिवार्य है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को कहा कि वे क्षेत्र के विकास के लिए इन कंपनियों का सहयोग लें और विकास कार्यों के प्रस्ताव बनाकर भेजें।
पठानिया के सवाल पर गोलमोल जवाब
विधायक राकेश पठानिया के सवालों में कुछेक अफसर फंस गए। राकेश पठानिया ने शिक्षा विभाग के अफसर से पूछा कि स्कूलों के साइंस ब्लॉक की स्थिति बदहाल क्यों है। अमूमन साइंस ब्लाक में केमिकल गैस, लैब के उपकरण ही नहीं हैं। इस पर अफसर गोलमोल जवाब देते रहे। बागवानी और सेनिटेशन सहित अन्य विभागों के अफसर भी पठानिया के सवालों के जवाब नहीं दे पाए।