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सादगी के बीच साधी राजनीति

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सुनील चड्ढा
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धर्मशाला।
कांगड़ा जिला को मंडी का छोटा भाई बताने वाले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सबसे बड़े सियासी दुर्ग को सादगी से साधकर नए सियासी समीकरण बनाने की कोशिश की। शीत सत्र के पहले प्रवास की एंट्री के साथ ही हालांकि सीएम की बैजनाथ जनसभा में कुछ लोगों की जेबें कट गईं लेकिन लोगों की भीड़ से उत्साहित जयराम ने यहां से सादगी की सियासी यात्रा शुरू की। इस दौरान जयराम ने बैजनाथ में जोगिंद्रनगर से निर्दलीय विधायक प्रकाश राणा से मिलकर राजनीतिक कूटनीति के संकेत दिए। देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह भी सीएम के दो कार्यक्रमों में पहुंचे तो सियासी हलचल मच गई। सीएम ने भी जनसभाओं में दोनों निर्दलीय विधायकों को अपनत्व से जोड़ा।
शांता के गढ़ पालमपुर में भाजपा पितामह को अपना सियासी गुरू बताया तो सुलह में स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार की जनसभा में प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा को साथ लेकर संगठन और सरकार के एकसाथ मिलकर विकास की यात्रा पर चलने का संदेश दिया। ज्वालामुखी विस क्षेत्र में प्रदेश संगठन मंत्री पवन राणा के घर जाकर सीएम ने कई घोषणाएं कीं। इससे उन्होंने अपरोक्ष रूप से मंत्री पद न मिलने से नाराज चल रहे विधायक रमेश धवाला को साधने की कोशिश की। कांगड़ा जिले के कुछ बड़े नेता निगमों और बोर्डों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद झटकने की उम्मीद में जयराम के आगे पीछे घूमते रहे लेकिन जयराम ने आखिरी समय तक अपने पत्ते नहीं खोले।
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राकेश पठानिया, रमेश धवाला, त्रिलोक कपूर, दूलो राम, इंदू गोस्वामी समेत कुछ अन्य नेता इन पदों की दौड़ में शामिल बताए गए लेकिन शीत सत्र के पहले चरण में कोई भी सियासी पत्ता नहीं खुला।
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चर्चा का विषय रही पठानिया की गैरमौजूदगी
अपील के बाद आम जनता ने सीएम राहत कोष में खुलकर योगदान दिया। नेताओं ने सीएम दौरे में अपनी हाजिरी भी दर्ज कराई लेकिन नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया की मुख्यमंत्री कार्यक्रमों से गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। उधर, मंत्री किशन कपूर, विपिन परमार, बिक्रम ठाकुर और सरवीण चौधरी हर विस क्षेत्र में सीएम के सारथी बने रहे। मुल्ख राज प्रेमी, रवि धीमान, अरुण कूका, रीता धीमान, अर्जुन ठाकुर अधिकतर कार्यक्रमों में सीएम के साथ चले। रमेश धवाला भी करीब दो कार्यक्रमों में साथ रहे।
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बाली के गढ़ में जाते ही बदले तेवर
बैजनाथ, पालमपुर और धर्मशाला में सिर्फ शिलान्यास किए। तीनों विधानसभा क्षेत्रों में घोषणाओं से परहेज करने वाले जयराम बाली के गढ़ रहे नगरोटा बगवां में अचानक रक्षात्मक से आक्रामक मुद्रा में आ गए। यहां पर जयराम ने चुनावी माहौल की तर्ज पर घोषणाओं का सिलसिला शुरू किया। सुलह, जयसिंहपुर, जवाली और शाहपुर में जयराम ने कालेज से लेकर तहसील जैसी बड़ी घोषणाएं कीं।
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दूसरी राजधानी और स्मार्ट सिटी पर चुप्पी
जयराम ने कांगड़ा को घोषणाओं की सौगातें भी दीं लेकिन कांग्रेस के चुनाव में धर्मशाला को दूसरी राजधानी के रूप में फेंके गए सियासी पासे पर वे चुप रहे। 7 दिनों में जयराम न तो दूसरी राजधानी पर बोले और न ही पौने दो साल में शून्य प्रगति करने वाली स्मार्ट सिटी पर कोई बयान दिया।
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