नूरपुर (कांगड़ा)। पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद नूरपुर शहर की जनता पांच साल से पेयजल किल्लत से जूझ रही है। हालत यह है कि लोगों को सुबह-शाम दो वक्त पानी की सप्लाई नहीं मिल रही है। दिन में एक बार सप्लाई आती है , लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। नूरपुरवासियों की यह चिरलंबित मांग चुनावी वायदों तक ही सिमटी है। नतीजतन, शहर में बढ़ती आबादी और जरूरतों को लेकर आईपीएच विभाग के उदासीन रवैये के चलते नूरपुर शहर को मिलने वाला एक वक्त का पानी भी लोगों की प्यास बुझाने के लिए पूरा नहीं पड़ रहा है, जबकि आईपीएच विभाग में फील्ड स्टाफ की कमी के बीच मेन लाइनों में पानी की लीकेज, वेस्टेज और खासकर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम सही न होने का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
विभागीय जानकारी के मुताबिक नूरपुर शहर में सर्वप्रथम वर्ष 1955 में 2169 आबादी के लिए पहली पेयजल योजना बनाई गई थी। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को 10 गैलन पानी प्रतिदिन देने का प्रावधान रखा गया था। बाद में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए 1980 में उक्त पेयजल योजना का विस्तार किया गया। इसमें 5863 व्यक्तियों और 1430 स्कूली बच्चों के लिए 20 गैलन पानी दिया जाने लगा, लेकिन लगातार बढ़ती आबादी और जरूरतों के आगे उक्त पेयजल योजना से पेयजल आपूर्ति करना मुश्किल होने लगा तो 1996 में तत्कालीन विधायक रणजीत बक्शी के प्रयास से नूरपुर के श्मशानघाट के निकट नूरपुर पेयजल योजना का फेस-2 शुरू किया गया। इसके बाद धूमल सरकार में तत्कालीन विधायक राकेश पठानिया ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री शांता कुमार के मार्फत चक्की खड्ड पर फेस-3 पेयजल मंजूर करवाई। इसके तहत आईपीएच विभाग ने 2001 में 19,524 शहरी आबादी, स्कूली छात्रों, रेस्ट हाउस और अस्पताल को ध्यान में रखते हुए 3.28 करोड़ लागत की नई पेयजल योजना के तृतीय चरण का प्रारूप तैयार किया गया था। इसके क्रियान्वयन से शहर में 24 घंटे पानी की आपूर्ति देने के दावे किए जाते रहे, लेकिन अब तक दो वक्त की वाटर सप्लाई भी चालू नहीं हो पाई है।
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फेस-1, 2, 3 से मिलती है शहर को वाटर सप्लाई
फेस-1 में लेतरी-खज्जन से पानी सूरज टिल्ले पर बने 3 लाख, 90 हजार और 60 हजार लीटर क्षमता के स्टोरेज टैंकों के माध्यम से सप्लाई किया जाता है। फेस-2 में थोड़ा-भलून और श्मशानघाट में स्थापित पेयजल योजना से स्वर्ग आश्रम के पास बने 2 लाख लीटर क्षमता के ओवरहेड टैंक, हनुमान मंदिर के पास 90 हजार लीटर और जसालता-1 में एक लाख लीटर और जसालता-2 में करीब 60 हजार लीटर क्षमता के टैंकों से विभिन्न वार्डों में पीने के पानी सप्लाई किया जाता है। इसी तरह चक्की दरिया के किनारे स्थापित फेस-3 योजना से पानी उठाकर कोपड़ा के पास भरमाल में बने 1 लाख 54 हजार लीटर क्षमता के पानी के टैंक में डाला जाता है और सूरज टिल्ले पर करीब 6 लाख 72 हजार लीटर क्षमता के मुख्य टैंकों से आगे रामपुरी, कुम्हार मोहल्ला और कचहरी में बने ओवरहेड टैंकों के जरिये लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है।
किसी भी निजी फर्म ने नहीं दिखाई दिलचस्पी
वर्तमान कांग्रेस सरकार में करीब दो साल पहले नूरपुर समेत पालमपुर, नाहन, पांबटा साहिब, बद्दी और परवाणू के शहरी क्षेत्रों में आईपीएच विभाग ने 24 घंटे पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया था। इस पायलट प्रोजेक्ट को ट्रिपल पी मोड (प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप) के तहत क्रियान्वित किया जाना था, लेकिन इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में किसी भी प्राइवेट फर्म ने अपनी दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके चलते उक्त शहरों में चौबीसों घंटे पीने का पानी उपलब्ध करवाने की योजना सरकारी फाइलों में ही सिमटकर रह गई।
क्या कहते हैं अधिकारी
आईपीएच विभाग के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार का कहना है कि बरसात के समय शहर में पानी किल्लत की समस्या पेश आई ती, लेकिन अब शहर की सप्लाई पहले से बेहतर चल रही है। अगर कहीं फिर भी समस्या है तो उसे दुरुस्त किया जाएगा। जहां तक दिन में दो टाइम पानी की आपूर्ति करने का सवाल है तो इसमें फील्ड स्टाफ की कमी सबसे बड़ी समस्या है।