बैजनाथ (कांगड़ा)। पर्यटन विकास और लोगों को आवागमन की सुविधा की दृष्टि से महत्वपूर्ण होली-उतराला मार्ग के निर्माण का मसला बीते दो दशकों से मात्र सर्वे की घोषणाओं में अटका है। राजनीतिक पार्टियों की इच्छा शक्ति के अभाव में बैजनाथ के उतराला से चंबा के होली के लिए प्रस्तावित मार्ग प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा और चंबा के लोगों के मिलन का गवाह नहीं बन सका है।
वर्तमान में करीब दो हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस मार्ग का सुरंगों के माध्यम से निर्माण होने पर चंबा से कांगड़ा की दूरी 300 किलोमीटर से कम होकर मात्र 75 किलोमीटर रह जाएगी। इस मार्ग में आने वाले स्थल पर्यटन की दृष्टि से इतने मनमोहक हैं कि पर्यटक मनाली के बजाय इस मार्ग का भ्रमण करने के लिए आतुर होंगे। मार्ग के निर्माण से दोनों जिलों की दूरी कम होने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वर्ष1998 में तत्कालीन भाजपा विधायक दूलो राम के कार्यकाल में नाबार्ड के तहत उतराला-होली मार्ग के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की राशि जारी हुई थी। उस समय उतराला की तरफ से चार किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण भी किया गया था। उसके बाद के वर्षों में बनी भाजपा और कांग्रेस की सरकारें मार्ग के निर्माण के लिए मात्र घोषणाएं ही करती आई हैं और किसी भी पार्टी ने इस मार्ग के निर्माण को अपने एजेंडे में रखने की जहमत नहीं उठाई। वर्तमान में स्थिति यह है कि चंबा जिले की ओर से लाके वाली माता के मंदिर के समीप तक मार्ग का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन आगे का निर्माण कब शुरू होगा, इसका जवाब कोई देने को तैयार नहीं है। इस बारे भाजपा के पूर्व विधायक दूलो राम का कहना है कि उतराला होली-मार्ग के मसले को जनहित की आवाज संस्था के माध्यम से उठाया गया है। इस मार्ग के निर्माण से कांगड़ा और चंबा जिलों के 20 विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
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कांग्रेस के विधायक किशोरी लाल का कहना है कि इससे पर्यटन रोजगार प्राप्त होगा और वह तीन मर्तबा मामले को विधानसभा में उठा चुके हैं। लोगों के इस सपने को पूरा करेंगे ।
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भाजपा उम्मीदवार मुलख राज प्रेमी का कहना है कि भाजपा सरकार मार्ग के निर्माण को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाएगी।