अमर उजाला ब्यूरो
डमटाल (कांगड़ा)। ठाकुर राम गोपाल मंदिर डमटाल की 33 हेक्टेयर कुल 857 कनाल भूमि का फर्जीवाड़ा सामने आया है। मुजाहरा एक्ट की आड़ में करोड़ों रुपये की भूमि को नियमों को ताक पर रखकर गैर मरूसि लगा लोगों के नाम कर दी गई। हद तो तब हुई जब मुजाहरा एक्ट बंद होने के कई वर्षों बाद सन 1982 में कब्जाधारियों को गैर मरूसि की श्रेणी में लाकर करोड़ों की भूमि धोखाधड़ी से लोगों के नाम की गई। वर्षों बीत जाने के बाद भी सरकार मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जाधारियों पर कोई कार्रवाई न कर पाई है।
ठाकुर राम गोपाल मंदिर डमटाल जिसकी हजारों एकड़ भूमि जो कि सरकार के अधीन है, जिस पर 24 अवैध कब्जाधारियों ने 4/10/1975 को लागू हुए मुजाहरा एक्ट की आड़ में गैर मरूसि की श्रेणी में आकर मंदिर की 33 हेक्टेयर कुल 857 कनाल भूमि सन 1991-92 में अपने नाम करवा डाली और मालिक बनने के बाद मंदिर की भूमि को करोड़ों रुपये में बेच डाला। यही नहीं मुजाहरा एक्ट 1976 में बंद होने के बाद भी 1982 में मंदिर की भूमि पर मुजाहरा एक्ट के तहत गैर मरूसि की श्रेणी में लोगों को लाकर मालिक बना दिया गया, जिसके पीछे प्रशासन और सरकार पूरी तरह से संलिप्त था। मुजाहरा एक्ट के अनुसार प्रदेश की किसी भी मंदिर की भूमि को नाबालिग की श्रेणी में रखा गया है, जिसके अनुसार मंदिर की भूमि पर कोई भी कब्जाधारी मुजाहरा एक्ट के तहत न ही इसे बेच सकता है न खरीद सकता है और न ही कभी मालिक बन सकता है। फिर करोड़ों की सरकारी भूमि को किस आधार पर इन लोगों के नाम कर दिया गया, जोकि अब तक सबसे बड़ा घोटाला खुल कर सामने आया है । कब्जाधारी चंद पैसों से प्रशासन का मुंह बंद करवाकर करोड़ों रुपये की भूमि पर कुंडली जमाये बैठे हैं। सरकार और प्रशासन मूक दर्शक बन तमाशा देखता रहा। आरोप है कि इस सारे प्रकरण में सरकार और प्रशासन पूरी तरह से संलिप्त है नियमों को ताक पर रखकर सरकारी भूमि को लोगों के नाम कर दिया गया।
कोट्स
-ठाकुर राम गोपाल मंदिर डमटाल के आयुक्त एवं जिलाधीश कांगड़ा संदीप कुमार ने बताया कि मंदिर नाबालिग की श्रेणी में आता है, जिसके अनुसार मंदिर की भूमि पर कोई भी मालिक नहीं बन सकता। कुछ मामलों पर जांच चल रही है, जहां तक समय बीत जाने के बाद मुजाहरा एक्ट की श्रेणी में लाकर मंदिर की भूमि देने का सवाल है। उस पर निश्चित तौर पर जांच बिठा कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।