फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस में भाजपा के बजाय अपनों को निपटाने की मुहिम

विज्ञापन
विज्ञापन
कांग्रेस में भाजपा के बजाय अपनों को निपटाने की मुहिम
विज्ञापन

धर्मशाला सम्मेलन में सुक्खू के खिलाफ वीरभद्र खेमे का शक्ति प्रदर्शन
विरोधी खेमे ने बनाई दूरी, कांगड़ा में दिखे सुक्खू पर सम्मेलन में नहीं गए
सुनील चड्ढा
धर्मशाला। अंतर्कलह में फंसी कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के बजाय अपने ही विरोधियों को चित्त करने में उलझी गई है। धर्मशाला कांग्रेस सम्मेलन में वीरभद्र खेमे ने शक्ति प्रदर्शन कर प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को हटाने और लोकसभा चुनाव में अपने मनपसंद के उम्मीदवार उतारने के लिए खुले तौर पर मुहिम शुरू कर हाईकमान के समक्ष दबाव बनाने की कोशिश की। बाकायदा प्रस्ताव पारित कर कांगड़ा में चार संगठनात्मक जिले बनाने के सुक्खू के फैसले को पलट कर तेवर दिखाए गए।
विज्ञापन

सम्मेलन में चंबा-कागड़ा जिलों से वीरभद्र खेमे के सिवाय विरोधी खेमे का कोई नेता नहीं पहुंचा। पूर्व मंत्री चंद्रेश कुमारी, राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर, पूर्व मंत्री जीएस बाली, विधायक आशा कुमारी सम्मेलन में नहीं आए। सुक्खू के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के बाद सम्मेलन में वीरभद्र खेमे के सभी नेताओं ने लोकसभा चुनाव की कमान वीरभद्र सिंह को देने की वकालत की। बिना नाम लिए अपने उम्मीदवारों के लिए प्रचार में जुटने की अपील की गई। उधर, धर्मशाला सम्मेलन शुरू होने से थोड़ी देर पहले प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू कांगड़ा में दिखे। वे दोपहर करीब दो बजे दिल्ली से एयर इंडिया के विमान में कांगड़ा एयरपोर्ट पर उतरे। कांगड़ा में होने के बावजूद वे धर्मशाला सम्मेलन में शिरकत करने नहीं गए। कहा जा रहा है कि शिमला में सार्वजनिक मंचों के बाद वीरभद्र सिंह अब सुक्खू के खिलाफ सियासी लड़ाई को कार्यकर्ताओं के बीच ले गए हैं ताकि हाईकमान पर दबाव बनाया जा सके। जानकार कह रहे हैं कि सुजानपुर और धर्मशाला में कांग्रेस के दोनों ही सम्मेलनों में सुक्खू की गैरमौजूदगी और वीरभद्र खेमे के आक्रामक रुख से लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में नया सियासी संकट पैदा हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें