मनमोहन चंबियाल
फतेहपुर (कांगड़ा)। विश्व प्रसिद्ध रामसर साइट वेटलैंड महाराणा प्रताप सागर (पौंग झील) में ठंड बढ़ने के साथ ही प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। वन्य प्राणी विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पौंग झील में इस समय ग्यारह प्रजातियों के करीब 16 हजार प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं। पौंग झील में हर वर्ष सर्दियां शुरू होते ही रूस, चीन, मध्य एशिया, इंडोनेशिया आदि देशों में अत्यधिक बर्फ पड़ने से वहां के पक्षी अनुकूल वातावरण और पसंदीदा भोजन की तलाश में हर वर्ष पौंग झील में आते हैं। कुछ विदेशी पक्षी मांसाहारी हैं, जिन्हें पौंग झील में अनेक तरह की मछलियां भोजन के रूप में उपलब्ध होती हैं। हर साल अनेक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी लाखों की संख्या में पौंग झील पहुंचकर नवंबर से मार्च तक अपनी अठखेलियों और करतबों से पक्षी प्रेमियों और झील में आने वाले सैलानियों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। उल्लेखनीय है कि पौंग झील में पिछले वर्ष 76 प्रजातियों के एक लाख प्रवासी पक्षी आए थे, जिनमें बारहैंडडगीज, कॉमन कुट्स, पिंटैन, कोस स्टीन और लिटिल नामक प्रवासी पक्षी शामिल थे और कुछ खास किस्म के पक्षी भी झील में पहली बार आये थे जिनमें वाटररेल, ब्राउनक्रोक, जेक नाइट, सारस क्रेन ब्लैक ब्लेड फ्ऱिन कॉमन पोचर्ड, बारहेडेड गीज, रूडी शेल डक प्रजातियां इनमें शामिल थी।
वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ कृष्ण कुमार ने बताया कि विभाग की अनुमानित गणना के मुताबिक अब तक पौंग झील में बारहैंडडगीज, ग्रेलैगगीज, नॉर्दन शालवर, नॉर्दन पिंटेल, कामन पौचार्ड, टाफटेड डक, रडीशाल, डक ब्लैक, हैंडेड गल, पालास गल और कामनटिल प्रजातियों के पक्षी झील में दस्तक दे चुके हैं।
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झील में पर्यटकों की आमद भी बढ़ी
वन्य प्राणी विभाग का मानना है कि जिस तरह भारी संख्या में प्रवासी पक्षियों की आमद शुरू हुई है, इससे नवंबर के अंत तक प्रवासी पक्षियों की संख्या एक लाख से भी अधिक होने के आसार हैं। दूसरी ओर प्रवासी पक्षियों की दस्तक के साथ ही पौंग झील में पर्यटकों की आमद भी बढ़ने लगी है। ये प्रवासी पक्षी झुंडों में विचरण करते हैं। पौंग झील को अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट वैटलैंड घोषित किया गया है और वैटलैंड क्षेत्र में विचरण करने वाले वन्य जीव प्रभावित न हों, इसलिए उस क्षेत्र में वाहन ले जाना वर्जित कर दिया है।