धर्मशाला। सूबे के सबसे बड़े सियासी दुर्ग कांगड़ा में प्रत्याशियों की आधिकारिक टिकट सूची जारी होने से पहले ही घमासान मच गया है। कांगड़ा जिला की जिन सीटों पर भाजपा ने पिछली बार गलती कर सरकार बनते-बनते गंवा दी थी, इस बार फिर से उन्हीं विधानसभा क्षेत्रों में खुलेआम विरोध शुरू हो गया है।
कांगड़ा जिला के टिकट आवंटन में भाजपा के पितामह रहे शांता कुमार के गृह क्षेत्र पालमपुर में ही उनके अपने टिकटार्थी प्रवीण शर्मा के समर्थकों ने महिला मोर्चा की अध्यक्ष इंदु गोस्वामी के पालमपुर से टिकट फाइनल होने की अटकलों के बाद इस्तीफे की धमकी दे दी। शांता कुमार भी भीष्म पितामह की तरह शांति संबोधन देने के सिवाय कुछ नहीं कर पाए।
उधर, पिछले चुनाव में अपनी ही पार्टी के दो नेताओं के आजाद चुनाव लड़ने की वजह से सीट हारने वाले पूर्व मंत्री किशन कपूर के विधानसभा क्षेत्र धर्मशाला में विरोध सातवें आसमान पर है। समर्थकों को जब धर्मशाला से किशन कपूर की टिकट कटने की अटकलों की सूचना मिली तो कपूर को आजाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ाने की धमकी दे दी गई।
जबकि, फतेहपुर विस क्षेत्र में भी भाजपा प्रदेश महामंत्री कृपाल परमार को टिकट मिलने की खबरें आने पर फतेहपुर मंडल भाजपा ने मंगलवार को हंगामापूर्ण बैठक कर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बलदेव ठाकुर को बतौर आजाद प्रत्याशी उतारने की बात कही है। उधर, नूरपुर से पूर्व विधायक राकेश पठानिया को टिकट मिलने की अटकलों के बाद मंगलवार को जिला नूरपुर के महामंत्री रणवीर सिंह निक्का को लेकर कंडवाल में उनके समर्थकों ने बैठक की। निक्का के समर्थन में नारेबाजी हुई। समर्थक निक्का को टिकट देने की वकालत कर रहे थे। जाहिर है कि टिकटों की सूची जारी होने से पहले ही सियासी जमीन के भीतर विरोध की चिंगारी सुलग गई है, जो बारूद बनने को आतुर है। पालमपुर से पिछले चुनाव में शांता के उम्मीदवार प्रवीण कुमार बुटेल करीब 9 हजार वोटों से हार गए थे। पालमपुर से भाजपा के नेता रहे दूलो राम हिलोपा में शामिल होकर चुनाव लड़कर 6075 वोट ले गए थे, जो बीजेपी के घातक साबित हुुआ।
किशन कपूर पिछली बार कांग्रेस के सुधीर शर्मा से करीब 5 हजार वोटों से हारे थे। कपूर के खिलाफ उनकी ही अपनी पार्टी की कमला पटियाल (3580) और अमर दास (2269) ने बतौर आजाद प्रत्याशी चुनाव लड़कर जीती हुई सीट हरवा दी थी। इस बार फिर डाढ़ से उमेश दत्त की टिकट फाइनल होने की अटकलों के बाद कपूर समर्थक गुस्साए हैं। वहीं, पिछले चुनाव में सुजान पठानिया 18,662 वोट हासिल कर जीते थे। भाजपा प्रत्याशी बलदेव को 11445 वोट मिले थे। जबकि, भाजपा के राजन सुशांत की पत्नी सुधा सुशांत ने निर्दलीय उतर कर 9335 वोट हासिल किए थे, जिस वजह से भाजपा हार गई थी।
नूरपुर सीट से रणवीर निक्का को भाजपा की टिकट मिली थी, लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई थी। भाजपा के ही राकेश पठानिया ने बतौर आजार उम्मीदवार चुनाव लड़ा था और अजय महाजन से महज 3 हजार वोटों से हारे थे। अगर राकेश पठानिया को टिकट मिलती तो पिछली बार नूरपुर की सीट पार्टी की झोली में आ सकती थी।